MBBS की एक डिग्री..सरकारी नौकरी कर रहे दो डॉक्टर: भास्कर की पड़ताल- एक के पास रजिस्ट्रेशन ही नहीं, जॉइनिंग के वक्त दस्तावेजों में हेराफेरी – Madhya Pradesh News

MBBS की एक डिग्री..सरकारी नौकरी कर रहे दो डॉक्टर:  भास्कर की पड़ताल- एक के पास रजिस्ट्रेशन ही नहीं, जॉइनिंग के वक्त दस्तावेजों में हेराफेरी – Madhya Pradesh News




मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक ही एमबीबीएस डिग्री पर दो डॉक्टर 15 साल से ज्यादा समय से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। दोनों ने करोड़ों की सैलरी ली और सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ निजी क्लीनिक भी चलाए। सबसे चौंकाने वाली बात है कि विभाग को इसकी भनक नहीं है। इनमें से एक की डिग्री असली है, दूसरे की फर्जी है। भास्कर ने दोनों से दस्तावेजों पर सवाल किए। एक ने कहा- उसके पास असली डिग्री है। दूसरे ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद मप्र मेडिकल काउंसिल में दस्तावेजों की पड़ताल की गई। स्थिति साफ हो गई। इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई। वे बोले- उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए, कौन डॉक्टर असली है और कौन संदिग्ध.. कैसे खुली परत-दर-परत सच्चाई
पड़ताल की शुरुआत बालाघाट से हुई। भास्कर की टीम बिरसा के सरकारी अस्पताल पहुंची। यहां जानकारी मिली कि डॉ. सुनील कुमार सिंह BMO हैं, लेकिन उस समय मौजूद नहीं थे। कर्मचारियों ने बताया कि वे रीवा गए हुए हैं और उनका घर दमोह गांव में है। टीम दमोह पहुंची, जहां स्वास्थ्य केंद्र के बोर्ड पर उनका नाम दर्ज मिला। स्टाफ ने बताया कि वे अब कम ही आते हैं, लेकिन घर के पास सुबह कुछ घंटे क्लीनिक चलाते हैं। उनके घर पर कोई नेम प्लेट या क्लीनिक का बोर्ड नहीं मिला। आसपास के लोगों और मेडिकल स्टोर संचालकों ने पुष्टि की कि वहीं उनका घर और क्लीनिक है, जहां वे बिना किसी बोर्ड के मरीज देखते हैं। दो-तीन दिन बाद सुनील कुमार सिंह बिरसा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का इलाज करते मिले। दस्तावेजों में अलग-अलग पहचान
भास्कर ने सुनील कुमार सिंह के जॉइनिंग के दौरान दिए दस्तावेजों की जांच की। चार अहम बातें पता चलीं… दूसरा डॉक्टर और असली डिग्री का दावा
दूसरी तरफ, टीम ने देवास में पदस्थ डॉ. सुनील कुमार से संपर्क किया। उन्होंने अपनी ओरिजिनल डिग्री और परमानेंट रजिस्ट्रेशन दिखाया। बालाघाट वाले डॉक्टर की डिग्री की कॉपी दिखाने पर उन्होंने पुष्टि की कि यह उनकी ही डिग्री की फोटोकॉपी है। उन्होंने कहा कि वे किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते, जो उनकी डिग्री का इस्तेमाल कर रहा हो। उन्होंने यह भी बताया कि… मेडिकल काउंसिल में एक ही के दस्तावेज
मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल से इस मामले में जानकारी ली गई। सामने आया कि दोनों के नाम से जुड़े दस्तावेज एक ही व्यक्ति के हैं। काउंसिल ने परमानेंट रजिस्ट्रेशन (नंबर 2909) का रिकॉर्ड दिखाया। उसमें देवास में कार्यरत डॉक्टर की तस्वीर थी। इससे साफ संकेत मिला कि असली रजिस्ट्रेशन देवास वाले डॉक्टर का है। बालाघाट में पदस्थ डॉक्टर की स्थिति संदिग्ध है। बालाघाट के सीएमएचओ बोले- शिकायत मिली है
बालाघाट जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ परेश उपलप कहते हैं कि बीएमओ सुनील कुमार के दस्तावेज के संबंध में उन्हें कुछ दिन पहले शिकायत मिली थी। इसकी जांच चल रही है।उन्होंने कहा कि सुनील कुमार ने जॉइनिंग के वक्त जो दस्तावेज दिए, उनमें कहां गड़बड़ी है, यह जांच के बाद बताएंगे। वहीं बीएमओ डॉक्टर सुनील कुमार का पक्ष जानने के लिए उनसे फोन पर संपर्क की कोशिश की गई। उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया। इसके साथ ही उनके वॉट्सऐप पर डॉक्यूमेंट भेजकर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इसका भी जवाब नहीं दिया। जिम्मेदार बोले- जानकारी मिलेगी तो करेंगे कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त एस. धनराजू से इस गंभीर मामले पर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने ऑफिशियल बयान देने से इनकार किया। कहा कि डिटेल मिलने पर ही मामले को देखेंगे। जानकार बोले- दस्तावेजों की जांच में हुई गड़बड़ी
मध्य प्रदेश चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीया ने बताया कि एक डिग्री और रजिस्ट्रेशन पर दो डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर सकते। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही है। उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हुआ। वे बोले- कि पीएससी या डायरेक्ट इंटरव्यू से भर्ती होने वाले कैंडिडेट्स के डॉक्यूमेंट वेरिफाई किए जाते हैं। यदि ऐसा मामला आया है, तो डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन के दौरान गड़बड़ी की संभावना है।



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