MP में बच्चों के HIV पॉजिटिव होने का गरमाया मामला, चौकाने वाले खुलासे

MP में बच्चों के HIV पॉजिटिव होने का गरमाया मामला, चौकाने वाले खुलासे


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वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने का मामला अब बड़े स्वास्थ्य घोटाले की शक्ल लेता नजर आ रहा है. मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई हैं. जहां डोनर्स का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया साथ ही संक्रमण की जांच में भी तय मानकों की अनदेखी की गई है.

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सरदार वल्लभभाई पटेल एचआईवी मामले की जांच रिपोर्ट

सतना. साल 2025 दिसंबर के महीने में सतना के वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया था. अब उस मामले में जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आई हैं. जिसने स्वास्थ्य सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में पता चला कि बच्चों को चढ़ाए गए खून के डोनर्स का कोई ठोस रिकॉर्ड मौजूद नहीं था. कई मामलों में डोनर की जानकारी अधूरी या पूरी तरह गायब मिली. इतना ही नहीं, खून की जांच में इस्तेमाल किए गए किट्स के बैच नंबर और कंपनी डिटेल्स तक दर्ज नहीं थे.

रिपोर्ट के अनुसार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले खून की सही तरीके से HIV और अन्य संक्रमणों के लिए जांच नहीं की गई. कुछ यूनिट्स को केवल रैपिड कार्ड टेस्ट से जांचा गया, जबकि तय प्रोटोकॉल के अनुसार अधिक संवेदनशील CLIA या ELISA टेस्ट अनिवार्य होते हैं.

क्या है TTI के मानक
आपको बता दें कि ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इंफेक्शन (TTI) के तहत हर डोनेट किए गए खून की जांच एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस के लिए अनिवार्य है. HIV की जांच के लिए 4th Generation ELISA या CLIA जैसे एडवांस टेस्ट जरूरी माने जाते हैं, जो संक्रमण के शुरुआती चरण में भी सटीक पहचान कर सकते हैं.

लेकिन जांच में सामने आया कि जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच संक्रमित बच्चों को जारी की गई जिसमें लगभग 17% की जांच केवल रैपिड कार्ड टेस्ट से की गई थी, जबकि तय मानकों के अनुसार CLIA या ELISA का इस्तेमाल होना चाहिए था. रैपिड कार्ड टेस्ट सस्ते और तेज होते हैं, लेकिन उनकी संवेदनशीलता कम होती है, जिससे शुरुआती संक्रमण छूट सकता है.

ये लापरवाहियां आई सामने
जांच में यह भी सामने आया कि डोनर्स से जरूरी स्वास्थ्य जानकारी लेने के लिए बनाए गए फॉर्म अधूरे थे. कई मामलों में बिना हेल्थ चेकअप और हीमोग्लोबिन जांच के ही खून लिया गया, जबकि रिकॉर्ड में सभी डोनर्स का हीमोग्लोबिन 12 ग्राम से अधिक दिखाया गया. काउंसलर की पोस्ट खाली होने के कारण डोनर्स की काउंसलिंग और स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही थी. ब्लड बैंक में रजिस्टर में कई एंट्री खाली मिलीं और दूसरे अस्पताल से लिया गया खून भी नियमों के विपरीत जारी किया जा रहा था. इस मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल को निलंबित कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पूरे सिस्टम में सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

बता दें कि 16 दिसंबर 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल सरकारी अस्पताल में संक्रमण का मामला को सामने आया था. जांच में थैलेसीमिया नामक एक आनुवंशिक रक्त विकार से पीड़ित बच्चों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था.

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Mohd Majid

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