गंगा सप्तमी कब है? क्यों शिव की जटाओं में उतरी गंगा, जानें तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा

गंगा सप्तमी कब है? क्यों शिव की जटाओं में उतरी गंगा, जानें तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा


होमताजा खबरधर्म

गंगा सप्तमी कब है? क्यों शिव की जटाओं में उतरी गंगा, जानें तिथि, पूजा विधि

Last Updated:

Ganga Saptami 2026: वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है. गंगा सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगा. इसका समापन 23 अप्रैल को रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार सप्तमी 23 अप्रैल को पड़ रही है, इसलिए इसी दिन गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा.

हिंदू परंपरा में गंगा सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है.मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए इसे गंगा जयंती भी कहा जाता है. हिंदू संस्कृति में गंगा सप्तमी का बहुत महत्व है. यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष तिथि दो दिन पड़ने से 22 या 23 अप्रैल को लेकर भ्रम बना हुआ है. कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं. ऐसे में आइए उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य रवि शुक्ला से जानते है इस दिन की सही तिथि के साथ सरल पूजा विधि और पौराणिक कथा.

कब मनाई जाएगी गंगा सप्तमी
वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है. गंगा सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगा. इसका समापन 23 अप्रैल को रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार सप्तमी 23 अप्रैल को पड़ रही है, इसलिए इसी दिन गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं.

गंगा सप्तमी पूजा विधि
गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें. अगर ऐसा संभव न हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल में मिलाकर स्नान करें. इसके पश्चात मां गंगा की तस्वीर पर या गंगा नदी में फूल, सिंदूर, अक्षत, गुलाल,लाल फूल, लाल चंदन अर्पित कर दें. इसके बाद घी का दीपक जलाकर आरती करें. इसके बाद जीवन में सुख और शांति के लिए मां गंगा से प्रार्थना करें. धार्मिक मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान करने से इंसान को सभी पापों से मटकी मुक्ति हैं. पापों से मुक्ति मिलने के साथ रोगों से छुटकारा मिलता है और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

पौराणिक ग्रंथो मे मिलती है गंगा सप्तमी की कथा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी गंगा पहली बार गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरी थीं, लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगा जल पी लिया. तब सभी देवताओं और भागीरथ ने ऋषि जह्नु से गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया.इसके बाद गंगा सप्तमी के दिन देवी गंगा फिर से धरती पर आईं और इसीलिए इस दिन को जह्नु सप्तमी भी कहा जाता है.

गंगा सतमी दूसरी कथा
एक बार, कोसल के राजा भागीरथ परेशान थे क्योंकि उनके पूर्वज बुरे कर्मों के पापों से पीड़ित थे.भागीरथ चाहते थे कि वे इससे मुक्त हों, इसलिए उन्होंने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि गंगा पृथ्वी पर आएंगी, उनके पूर्वजों की आत्मा को शुद्ध करेंगी. लेकिन वह जानते थे कि देवी गंगा का प्रवाह सब कुछ नष्ट कर सकता है, तब ब्रह्मा जी ने भागीरथ को भगवान शिव की पूजा करने के लिए कहा क्योंकि वे ही गंगा के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं. इसलिए उन्होंने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया. इस शुभ दिन देवी गंगा पृथ्वी पर उतरीं, इसलिए गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है.



Source link