डबल कमाई और मेहनत भी कम, 50 दिन में फसल तैयार, हाथों-हाथ बिकती हैं ये सब्जियां

डबल कमाई और मेहनत भी कम, 50 दिन में फसल तैयार, हाथों-हाथ बिकती हैं ये सब्जियां


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डबल कमाई और मेहनत भी कम, 50 दिन में फसल तैयार, हाथों-हाथ बिकती हैं ये सब्जियां

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Radish and Ladyfinger Farming: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल का महीना इन दोनों फसलों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. मूली और भिंडी दोनों ही ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी बाजार में सालभर मांग रहती है, लेकिन गर्मियों में इनके दाम और भी बेहतर मिलते हैं.

खंडवा. गर्मियों का मौसम किसानों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आता है. अगर किसान इस समय सही फसल का चुनाव करें, तो कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. ऐसी ही दो फसलें हैं.मूली और भिंडी, जिन्हें साथ में उगाकर किसान ‘डबल फायदा’ ले सकते हैं.

खास बात यह है कि इनकी खेती कम लागत में होती है और फसल भी जल्दी तैयार हो जाती है. मूली जहां 30 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है, वहीं भिंडी को तैयार होने में लगभग 45 से 55 दिन का समय लगता है. ऐसे में किसान एक ही खेत में दोनों फसलें लगाकर समय और जमीन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. इस तकनीक को मिश्रित खेती कहा जाता है, जो आज के समय में किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है.

कृषि सलाहकार सुनील पटेल बताते हैं कि अगर किसान मूली और भिंडी को साथ में लगाते हैं, तो उन्हें कम समय में अच्छा उत्पादन और बेहतर आमदनी मिल सकती है. यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए खास तौर पर लाभदायक है. खेती की शुरुआत के लिए सबसे पहले खेत की 2-3 बार अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें. इसके बाद रोटावेटर चलाकर खेत को समतल करें और उसमें पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं, ताकि मिट्टी की उर्वरता बढ़ सके.

खेती करने के लिए खास टिप्स
भिंडी की बुवाई के लिए 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी पर मेड़ें तैयार करें. भिंडी के पौधों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी रखें. वहीं, भिंडी की दो कतारों के बीच खाली जगह में मूली के बीज बोएं. मूली के बीज 1 से 2 इंच गहराई में और 2 से 3 इंच की दूरी पर बोना चाहिए.

मिश्रित खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि मूली की जड़ें मिट्टी को ढीला करती हैं, जिससे भिंडी की फसल को बढ़ने में मदद मिलती है. साथ ही, मूली जल्दी तैयार हो जाती है, जिसे निकालने के बाद भिंडी को पर्याप्त जगह और पोषण मिल जाता है, जिससे उसकी पैदावार और अच्छी होती है. सिंचाई के लिए बुवाई के तुरंत बाद पहली पानी दें, इसके बाद जरूरत के अनुसार सिंचाई करते रहें. ध्यान रखें कि भिंडी को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जबकि मूली में पानी का भराव नहीं होना चाहिए.

गोबर की खाद बहुत लाभदायक
खाद के रूप में प्रति एकड़ 5 से 10 टन गोबर की खाद डालना लाभदायक रहता है. साथ ही कीटों से बचाव के लिए समय-समय पर जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए, जिससे फसल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनी रहे. इस तकनीक से किसान एक ही खेत से दो फसलों का उत्पादन लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. मूली की जल्दी कटाई के बाद भिंडी का उत्पादन और बेहतर होता है, जिससे कुल मिलाकर यह खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन जाती है.

अगर किसान सही तरीके से योजना बनाकर इस ‘2-इन-1’ खेती को अपनाएं, तो गर्मियों में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं और कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा सकते है.

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Mohd Majid

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