एक घर, कई हस्तियां… 400 साल पुराना पुश्तैनी मकान, जहां से निकले देश के कई बड़े नेता

एक घर, कई हस्तियां… 400 साल पुराना पुश्तैनी मकान, जहां से निकले देश के कई बड़े नेता


Historic Khandwa House: मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के बीचों-बीच एक ऐसा पुश्तैनी मकान हुआ करता था, जिसे लोग सिर्फ एक घर नहीं बल्कि इतिहास की जीवित मिसाल मानते थे. लगभग 400 साल पुराना यह ऐतिहासिक घर अपने भीतर सैकड़ों सालों की यादें, परंपराएं और गौरवशाली उपलब्धियां समेटे हुए था. यह मकान न केवल अपनी उम्र के कारण खास था, बल्कि इससे जुड़ा हुआ परिवार और उसकी उपलब्धियां इसे और भी ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती थीं.

यह घर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भगवत राव मंडलोई के परिवार का पुश्तैनी निवास रहा है. इस घर में मंडलोई परिवार की कई पीढ़ियां पली-बढ़ीं और खास बात यह रही कि यहां दसवीं पीढ़ी तक लोगों ने निवास किया. इस घर का हर कोना इतिहास और संघर्ष की कहानी कहता था.

खंडवा का नाम रोशन करने वाला यह घर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश को कई बड़े चेहरे दिए. इसी घर से एक मुख्यमंत्री, दो विधायक और दो आईएएस अधिकारी निकले, जिन्होंने प्रशासन और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. यही कारण है कि यह मकान सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि सफलता और प्रेरणा का केंद्र बन गया था. इस ऐतिहासिक मकान की बनावट भी अपने आप में अनोखी थी.पूरा घर लकड़ी, पत्थर और चूने से तैयार किया गया था, जो आज के आधुनिक समय में भी अपनी मजबूती के लिए मिसाल माना जाता था. घर में की गई नक्काशी राजस्थान की पारंपरिक शैली पर आधारित थी, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती थी. बताया जाता है कि इस मकान को बनाने के लिए विशेष कारीगर राजस्थान से बुलाए गए थे, जिन्होंने अपनी कला से इसे एक अद्भुत रूप दिया.

इतना ही नहीं, यह घर कई ऐतिहासिक घटनाओं का भी साक्षी रहा है. स्वतंत्रता संग्राम के दौर से लेकर देश के बदलते राजनीतिक माहौल तक, इस मकान ने हर दौर को करीब से देखा. यहां कई बड़े राजनेताओं का आना-जाना रहा और कई महत्वपूर्ण चर्चाएं भी इसी घर की चौखट पर हुईं.

परिवार के सदस्य बताते हैं कि इस घर को इतने वर्षों तक बिना किसी बड़े बदलाव के संभाल कर रखा गया. समय-समय पर इसकी देखरेख जरूर की जाती थी, लेकिन इसकी मूल संरचना और डिजाइन को कभी बदला नहीं गया. यही वजह थी कि 400 साल बाद भी यह घर अपनी असली पहचान के साथ खड़ा रहा.

समाज के प्रति जिम्मेदारी भी सिखी
LOCAL 18 से बातचीत में लव जोशी जैसे परिवार के सदस्य इस घर को सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि संस्कारों की पाठशाला मानते हैं. उनका कहना है कि इस घर ने उन्हें सिर्फ छत ही नहीं दी, बल्कि जीवन जीने के मूल्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी सिखाई.

हालांकि समय के साथ इस ऐतिहासिक धरोहर को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन इसकी यादें आज भी खंडवा के लोगों के दिलों में जिंदा हैं. यह घर भले ही अब दिखाई नहीं देता, लेकिन इसकी कहानियां, इसकी विरासत और इससे जुड़ी गौरव गाथाएं आज भी लोगों के बीच जिंदा हैं. वास्तव में, खंडवा का यह 400 साल पुराना घर सिर्फ एक मकान नहीं था, बल्कि इतिहास, संस्कृति, परंपरा और सफलता का प्रतीक था. यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि कैसे एक साधारण सा घर भी असाधारण इतिहास रच सकता है.



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