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कान्हा टाइगर रिजर्व में पांच दिन के भीतर तीन बाघ शावकों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अमाही बाघिन के चार में से तीन शावक खत्म हो चुके हैं. पहले दो की मौत भूख से बताई गई थी, जबकि तीसरे की जांच जारी है. लगातार बढ़ती मौतें वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरे का संकेत दे रही हैं.
मंडला स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में तीसरे शावक की मौत से हड़कंप है.
मंडला. जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन (T-141) के तीसरे शावक (मादा) की मौत हो गई है. यह मौत ऐसे समय हुई है जब बीते दिनों में उसी बाघिन के दो अन्य शावकों (नर) की भी मौत हो चुकी है. लगातार हो रही इन मौतों ने सिस्टम की निगरानी और प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. चिंताजनक खबरों के बीच वन विभाग के सूत्रों ने कहा है कि इस समय बाघिन और उसके एक बचे शावक को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए, लेकिन ऐसी कोई तैयारी नहीं है. बताया जा रहा है कि अपने बच्चों की मौत से दुखी बाघिन ने खाना-पीना छोड़ दिया है. वह उसी इलाके में बैठी हुई है. उसके चार शावकों में से 3 की मौत हो चुकी है.
बताया जा रहा है कि मृत मादा शावक का शव सरही वन परिक्षेत्र के बड़े अमाही नाला क्षेत्र के पास मिला है. वन विभाग ने शव को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है. इससे पहले जिन दो शावकों की मौत हुई थी, उनकी वजह भूख बताई गई थी. अब तीसरे शावक की मौत ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. लगातार हो रही घटनाओं से यह साफ संकेत मिल रहा है कि रिजर्व में कुछ गड़बड़ जरूर है. अगर बाघिन शिकार नहीं कर रही थी तो विभाग को उसके भोजन के लिए इंतजाम करना चाहिए था. शावकों की देखभाल करने के लिए भी कोई प्रबंध नहीं किए गए. तीन में से दो शावक भूख के कारण मर गए.
सरही परिक्षेत्र में मिला तीसरे शावक का शव
वन विभाग के अनुसार मादा शावक का शव सरही वन परिक्षेत्र में अमाही नाले के पास मिला. सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया. शव को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.
5 दिन में 3 शावकों की मौत
21 अप्रैल को पहला नर शावक मृत मिला था. इसके बाद 24 अप्रैल को दूसरे शावक की मौत हुई. अब 25 अप्रैल को तीसरे शावक की भी मौत हो गई है. इस तरह पांच दिनों के भीतर तीन शावकों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पहले की रिपोर्ट में भूख बताई गई वजह
प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पहले दो शावकों की मौत की वजह भूख बताई गई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शावकों को पर्याप्त भोजन नहीं मिला, तो यह गंभीर प्रबंधन की कमी को दर्शाता है.
चार में से तीन शावकों की मौत
अमाही बाघिन ने कुल चार शावकों को जन्म दिया था. इनमें से तीन की मौत हो चुकी है. अब केवल एक शावक और बाघिन बची है. उनकी स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है. अप्रैल महीने में अब तक कान्हा में कुल चार टाइगर की मौत हो चुकी है. पिछले आठ महीनों में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत के आंकड़े सामने आए हैं. यह आंकड़े वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरे का संकेत दे रहे हैं.
क्या है मौत की असली वजह?
वन विभाग का कहना है कि मौत के सही कारण फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे. हालांकि लगातार भूख या कुपोषण की बात सामने आना चिंता बढ़ा रहा है. वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि शावकों की सुरक्षा और भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. यदि यह नहीं हुआ तो भविष्य में और भी नुकसान हो सकता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें