Chhatarpur News. बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री जैसी शुरुआत छतरपुर में फिर देखने को मिल रही है. अजयपार सरकार के नाम से प्रसिद्ध हो रहे 15 साल का लड़के की कहानी गजब है. गरीबी में ई-रिक्शा चलाया, मंदिर के बाहर नारियल दुकान लगाई और हजारों लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं. ऐसा दावा किया जाता है कि इनको अचानक एक शक्ति मिली, जिसके बाद ये दरबार लगाने लगे. आज सैकड़ों किलोमीटर दूर से लोग दरबार में आते हैं.
दरअसल, छतरपुर जिले के कैंड़ी गांव के करन कुशवाहा ‘अजयपार सरकार’ के नाम से गांव में ही दरबार लगाते हैं. यहां हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है. इनसे मिलने के लिए लोगों को घंटों इंतजार भी करना होता है. अजयपार सरकार के नाम से प्रसिद्ध करन कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि सोशल मीडिया में भले ही लोगों ने मुझे वायरल कर दिया, लेकिन मैं एक साधारण इंसान हूं. हमारे कैंड़ी गांव में चंदेल कालीन पहाड़ी है, जहां ‘अजरपार बब्बा’ का स्थान है. यहां हम आते-जाते रहते थे.
सब बब्बा का आशीर्वाद
आगे बताया, इस स्थान पर श्रद्धालु बहुत आते थे. यहीं पर लगभग 13 साल की उम्र में नारियल दुकान लगाने लगे. घर में गरीबी थी तो ई-रिक्शा भी चलाते थे. लेकिन, जब से अजयपार बब्बा के स्थान में दुकान रखी, तब से जीवन में चमत्कार जैसा हो गया है. बब्बा को दिल से मानने लगा और बब्बा की सेवा करने लगे तो बब्बा ने भी आशीर्वाद दिया.
ढाई महीने नारियल दुकान चलाई
करन बताते हैं कि आज लोग भले ही मुझे अजयपार सरकार या अजयपार बब्बा के नाम से पहचानते हों, लेकिन मैं तो अपने अजयपार बब्बा का एक भगत हूं, जो वह कहते हैं वही मैं बता देता हूं. मैं वही नारियल वाला छोटा बच्चा करन हूं, जिसने अपने बब्बा के दरबार में ढाई महीने तक नारियल दुकान लगाई है.
ऐसे मिली शक्ति
करन बताते हैं कि जब मैं अजयपार बब्बा महाराज के दरबार में नारियल दुकान चलाता था, तो हर दिन महाराजजी को दीया जलाया करता था. एक दिन दीया रखने के दौरान मैं अपने आप पीछे जा रहा था. इसी दौरान एक श्रद्धालु ने कहा कि तुम्हारे बब्बा सत्य के हों तो मेरा कैंसर ठीक कर दें? मैंने बब्बा से विनती कि आप अगर सत्य के हैं तो आज इस स्थान की लाज रख लीजिए. इसके बाद तीसरे दिन ही उस व्यक्ति का मरीज ठीक हो गया. वह व्यक्ति दिल्ली से थे और वह आज भी जिंदा हैं.
5 दिन कर चुके साधना
करन बताते हैं कि जहां लवकुश भगवान ने साधना की थी, उस स्थान पर लगातार 5 दिन-रात बगैर खाए तपस्या कर चुके हैं. हालांकि, 24 घंटे में आधा घंटा जरूरी काम के लिए तपस्या छोड़नी होती थी. अभी आगे और तपस्या करनी है.
कक्षा 10वीं में लेना है एडमिशन
करन बताते हैं कि वह स्कूल में पढ़ाई भी करते हैं. इस साल उन्होंने कक्षा 9वीं के पेपर दिए हैं. कक्षा 10वीं में पढ़ने जा रहे हैं. दरबार के साथ पढ़ाई भी करते रहेंगे.
अजयपार स्थान पर ही सुनते समस्या
करन बताते हैं कि वह अजयपार बब्बा के स्थान पर ही लोगों का भूत-भविष्य देख पाते हैं. कहने का मतलब कि वह इसी स्थान पर बैठकर ही लोगों की समस्याओं का निराकरण कर पाते हैं. बब्बा की इच्छा से ही यहां बैठकर समस्या सुनकर उनका उपाय बताते हैं. हालांकि, हम पर्चा नहीं बनाते हैं. हमें घबराहट सी होती है. इसके बाद हथेली पर देखकर समस्या और उपाय बता देते हैं.
3 दिन लगाते दरबार
करन बताते हैं कि वह ढाई साल से इतवार और बुधवार को दरबार लगाते चले आ रहे हैं. कुछ श्रद्धालु बहुत दूर-दूर से आते हैं, इसलिए अब शनिवार को झाड़ फूंक वाला दरबार लगाना शुरू कर दिया है. दावा किया कि यहां भूत-प्रेत के मरीज को झाड़-फूंक कर ठीक किया जाता है. अजयपार बब्बा झाड़-फूंक वाले ही बब्बा हैं, वह बीमारी ठीक करने का दावा करते हैं. फिलहाल सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक दरबार लगाते हैं इसके बाद शाम को 4 से 7 बजे तक लगाते हैं. करन बताते हैं कि वह 3 दिन दरबार लगाते हैं और बाकी दिन बब्बा की सेवा करते हैं.