टीकमगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल शिव धाम कुंडेश्वर स्थित श्री सिद्ध बाबा मंदिर में मंगलवार को श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर कलश यात्रा निकाली गई। शाम 6 बजे पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर भक्ति गीतों और जयकारों के साथ निकलीं। यह यात्रा कथा स्थल से भोले बाबा शिवधाम कुंडेश्वर पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद कलश यात्रा प्राचीन कुंड पर पहुंची, जहां पूजन के बाद कलशों में जल भरा गया। वापस कथा स्थल पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कलश स्थापना की गई। कथा व्यास पंडित श्री हरिओम द्विवेदी शास्त्री ने बताया कि कलश यात्रा केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि यह देवताओं के आह्वान और वातावरण की शुद्धि का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि कलश के मुख में भगवान विष्णु, कंठ में शिव और मूल में ब्रह्मा का वास होता है। इसमें 33 कोटि देवताओं और सभी तीर्थों का वास भी माना जाता है। पंडित श्री हरिओम द्विवेदी शास्त्री ने ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र के साथ कथा प्रारंभ की, जिसे आत्मा और परमात्मा के बीच का सेतु माना जाता है। उन्होंने कहा कि कलश धारण करने वाले भक्तों की आत्मा पवित्र और निर्मल हो जाती है। व्यास जी के अनुसार, भागवत कथा सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा में नारद मोह, भक्ति के कष्टों के निवारण और धुंधकारी प्रसंग सुनाए जाएंगे। धुंधकारी जैसे पापी व्यक्ति के उद्धार की कथा अक्सर भागवत की भक्ति के प्रभाव को दर्शाने के लिए सुनाई जाती है। इस कार्यक्रम का आयोजन मुख्य यजमान भानकुवर नेपाल सिंह द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर गोविंद सिंह, नेपाल सिंह, कमल सिंह, गुलाब सिंह, गोपाल सिंह, पाल सिंह, जसवंत सिंह, राघवेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, बहादुर सिंह, जय सिंह, हर प्रसाद यादव, शिवम द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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