सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर डामर पिघला: जिले में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा; अस्पतालों में बनी हीट स्ट्रोक यूनिट – Sehore News

सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर डामर पिघला:  जिले में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा; अस्पतालों में बनी हीट स्ट्रोक यूनिट – Sehore News




सीहोर जिले में भीषण गर्मी और राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं के कारण अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मंगलवार को तेज गर्मी के चलते सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर सड़क का डामर पिघलना शुरू हो गया है। अप्रैल महीने में पिछले दो दिनों से पारा 44 डिग्री के पार बना हुआ है, जिसने गर्मी के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लू और हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए जिले के सभी अस्पतालों में ‘हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट यूनिट’ और ओआरएस (ORS) कॉर्नर स्थापित कर दिए हैं। मई 2024 के बाद अप्रैल में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड जिले में इस साल अप्रैल माह में ही गर्मी ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इससे पहले 23 मई 2024 को सीहोर शहर का अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, लेकिन अप्रैल के महीने में ऐसी भीषण गर्मी पहले कभी रिकॉर्ड नहीं की गई। तेज धूप के कारण दोपहर के समय शहर की अधिकांश सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं। लोग केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही खुद को कपड़े से ढककर घरों से बाहर निकल रहे हैं। CMHO ने दिए सतत निगरानी और उपचार के निर्देश बढ़ते तापमान के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने अलर्ट जारी किया है। उन्होंने जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रभारी अधिकारियों को सतत निगरानी और उपचार के निर्देश दिए हैं। मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए अस्पतालों में पदस्थ स्वास्थ्य कर्मियों का उन्मुखीकरण (Orientation) भी किया जा रहा है। अस्पतालों में ठंडे पानी, पंखे और ओआरएस कॉर्नर की व्यवस्था स्वास्थ्य संस्थाओं को आने वाले मरीजों में लू के लक्षणों की तुरंत जांच करने और उचित प्रबंधन के निर्देश दिए गए हैं। वार्डों में मरीजों के लिए ठंडे पेयजल और पंखों की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, तेज धूप में ज्यादा देर तक रहना लू लगने का प्रमुख कारण है, जिससे शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए सभी संस्थाओं में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं और ओआरएस (ORS) कॉर्नर स्थापित किए गए हैं।



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