कभी किया था यूपीएससी क्रैक…अब बना देश के इस क्रिकेट टीम का हेड कोच

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कभी किया था यूपीएससी क्रैक…अब बना देश के इस क्रिकेट टीम का हेड कोच

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Amay Khurasiya appointments head coach of the Chhattisgarh: अमय खुरासिया को छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने सीनियर टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है. खुरासिया भारतीय खेल जगत के एकमात्र ऐसे इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं, जिन्होंने क्रिकेट के साथ-साथ प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा भी उत्तीर्ण की है. 1999 विश्व कप का हिस्सा रहे और अनुभवी कोच खुरासिया के पास रजत पाटीदार और आवेश खान जैसे सितारों को तराशने का अनुभव है. अब उनका लक्ष्य छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभाओं को सही दिशा देकर राज्य को घरेलू क्रिकेट में नई ऊंचाइयों पर ले जाना है.

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अमय खुरसिया टीम इंडिया में आने से पहले यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके थे.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व आक्रामक बल्लेबाज अमय खुरासिया को छत्तीसगढ़ की सीनियर पुरुष टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया है. खुरासिया की पहचान केवल एक पूर्व क्रिकेटर या कोच के रूप में नहीं है. क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के जड़ने और देश की सबसे कठिन परीक्षा ‘यूपीएससी’ (UPSC) को पास करने का अद्भुत मेल, उन्हें भारतीय खेल जगत के सबसे अनूठे व्यक्तित्वों में से एक बनाता है. आमतौर पर, एक एथलीट के लिए अपने खेल में शीर्ष पर पहुंचने के लिए उसे अपना सर्वस्व देना पड़ता है. दूसरी ओर, यूपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह एक ‘तपस्या’ की तरह है, जिसके लिए वर्षों की एकाग्रता की आवश्यकता होती है. इन दोनों के बीच एक पुल बनना लगभग असंभव माना जाता है, लेकिन अमय खुरासिया ने इसे संभव कर दिखाया. उन्हें भारत का एकमात्र ऐसा इंटरनेशनल क्रिकेटर माना जाता है, जिसने न केवल क्रिकेट खेला, बल्कि देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा भी उत्तीर्ण की.

अमय खुरसिया (Amay Khurasiya) का यह सफर किसी फिल्म की कहानी जैसा है. 1972 में मध्य प्रदेश में जन्मे अमय के लिए क्रिकेट का मैदान उनका पहला प्यार था. मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया, जो उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण था. लेकिन उनके भीतर एक ऐसी प्यास थी जो केवल बाउंड्री पार करने से शांत नहीं होती थी. वह बौद्धिक रूप से भी खुद को साबित करना चाहते थे.

अमय खुरसिया टीम इंडिया में आने से पहले यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके थे.

यूपीएससी और टीम इंडिया
अमय खुरासिया के करियर का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा तब उत्तीर्ण की थी, जब उन्होंने अभी भारतीय टीम के लिए डेब्यू भी नहीं किया था. यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि खेल और पढ़ाई एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं. एक तरफ वे मैदान पर पसीना बहाते थे, तो दूसरी तरफ किताबों के बीच अपनी प्रशासनिक समझ विकसित कर रहे थे. 1999 का साल उनके लिए मील का पत्थर साबित हुआ. जिस साल उन्होंने टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी, उस साल उनके पास पहले से ही एक सरकारी अधिकारी बनने की योग्यता थी. 1999 में श्रीलंका के खिलाफ ‘पेप्सी कप’ में अपने वनडे डेब्यू पर उन्होंने दुनिया को अपनी आक्रामक शैली का परिचय दिया. उन्होंने महज 45 गेंदों में 57 रनों की तूफानी पारी खेलकर साबित कर दिया कि वे बड़े मंच के खिलाड़ी हैं. उनका यह प्रदर्शन इतना प्रभावशाली था कि उन्हें 1999 के विश्व कप के लिए भारतीय टीम का हिस्सा बनाया गया. यह वह दौर था जब अमेय सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गजों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा कर रहे थे.

मैच-विनर तैयार करते हैं अमय खुरसिया
मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के साथ उनका 10 साल का कार्यकाल इस बात का गवाह है कि वे केवल खिलाड़ियों को नहीं, बल्कि मैच-विनर तैयार करते हैं. रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर और आवेश खान जैसे खिलाड़ी, जो आज इंटरनेशनल स्टेज पर अपनी पहचान बना चुके हैं, अमेय खुरासिया के मार्गदर्शन में पले-बढ़े हैं. उनकी कोचिंग शैली में वही अनुशासन और रणनीतिक सोच झलकती है, जो उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के दौरान सीखी थी. उन्होंने केरल को उनके 74 साल के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाकर यह साबित किया कि वे कम संसाधनों वाली टीमों को भी चैंपियन बनाने का माद्दा रखते हैं.

छत्तीसगढ़ क्रिकेट का नया सवेरा
अमय खुरासिया की नियुक्ति केवल एक कोच का आना नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ क्रिकेट के लिए एक ‘सिस्टम’ का आना है. छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के साथ लंबी चर्चाओं के बाद, खुरासिया ने राज्य की क्रिकेट संरचना को बदलने का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है. उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और मानसिक मजबूती की जरूरत है. कोच के रूप में अपनी नई भूमिका पर अमय ने कहा, ‘मैं चुनौतियों को स्वीकार करना पसंद करता हूं.’ यह वाक्य उनकी पूरी जीवन यात्रा का सार है. चाहे वह यूपीएससी की किताबें हों, 1999 विश्व कप का दबाव हो, या किसी उभरती हुई टीम को रणजी फाइनल तक ले जाना अमय खुरासिया ने हर बार खुद को साबित किया है.

अमय खुरसिया का क्रिकेट करियर
1999 से 2001 के बीच 12 वनडे और 1989 से 2006 के बीच 119 प्रथम श्रेणी मैचों का उनका करियर, अनुभव का खजाना है. लेकिन अमय खुरसिया का असली प्रभाव तब सामने आया जब उन्होंने स्टंप्स के पीछे से कोच की भूमिका संभाली. बीसीसीआई से ‘लेवल-सी’ सर्टिफाइड कोच के रूप में, पिछले दो दशकों से वे युवा प्रतिभाओं को तराश रहे हैं.

About the Author

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें



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