उज्जैन. मध्यप्रदेश के देवास जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) हरि सिंह भारती को उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह ने 11 अप्रैल 2026 को निलंबित कर दिया है.
संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, साल 2023-24 और 2024-25 के दौरान शासकीय हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों को मेंटेनेंस के लिए प्रति स्कूल 3 लाख रुपये की राशि दी गई थी. देवास जिले में ऐसे 180 से अधिक स्कूल हैं, जिनके लिए कुल 3 करोड़ 70 लाख 52 हजार 843 रुपये की राशि जारी हुई. इसके अलावा राष्ट्रीय क्रीड़ा, शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता और परीक्षा निधि के तहत भी लाखों रुपये का आवंटन हुआ था.
24 मार्च 2026 को डीईओ हरि सिंह भारती के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं. इसके बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित कर मामले की पड़ताल कराई. जांच में शिकायतें सही पाई गईं. डीईओ से जवाब मांगा गया, लेकिन उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया. जांच रिपोर्ट में सामने आया कि कुल मिलाकर करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में गड़बड़ी और नियमों का उल्लंघन किया गया है.
नियमों की अनदेखी और बिना टेंडर भुगतान
जांच में पाया गया कि 68वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए मिले 20 लाख रुपये में से बिना ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाए ही ट्रांसपोर्ट के लिए 2 लाख 50 हजार 710 रुपये और टेंट के लिए 5 लाख 49 हजार 220 रुपये का भुगतान कर दिया गया. शेष राशि का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला.
इसी तरह स्कूलों के मेंटेनेंस के लिए जारी करोड़ों रुपये भी बिना निर्धारित प्रक्रिया के खर्च किए गए. जांच टीम को मौके पर किसी भी प्रकार का काम या सुधार नजर नहीं आया, जिससे स्पष्ट होता है कि राशि का उपयोग नियमानुसार नहीं हुआ.
अन्य वित्तीय गड़बड़ियां भी उजागर
जांच में यह भी मामले आए सामने जिसमें 3 लाख 98 हजार 700 रुपये के कंप्यूटर बिना नियमों के खरीदे गए, 1 लाख 65 हजार 987 रुपये वाहन मरम्मत में खर्च किए गए, जीएसटी और टीडीएस काटे बिना 28 लाख 89 हजार 138 रुपये विभिन्न व्यक्तियों को वितरित किए गए, आवश्यक दस्तावेज और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए, इन सभी बिंदुओं को गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय नियमों का उल्लंघन माना गया है.
जमीनी हकीकत: स्कूलों में बदहाल स्थिति
जांच टीम ने देवास-उज्जैन रोड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगावाद का निरीक्षण किया. यहां हालात बेहद चिंताजनक पाए गए, निरीक्षण के दौरान छात्र ट्यूबवेल का पानी पीने को मजबूर पाए गए, वाटर फिल्टर प्लांट लंबे समय से बंद है, मैदान में लगी बेंच टूटी हुई, हैंडपंप खराब और नलों में टोंटियां नहीं थी. स्कूल परिसर में पक्की बाउंड्री वॉल का अभाव था, इन हालातों ने यह साफ कर दिया कि मेंटेनेंस के नाम पर खर्च की गई राशि का वास्तविक रूप से उपयोग नहीं हुआ.
डीईओ निलंबित, मुख्यालय अटैच
गंभीर लापरवाही, वित्तीय गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए डीईओ हरि सिंह भारती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उज्जैन मुख्यालय अटैच किया गया है. उन्हें जांच पूरी होने तक केवल जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. साथ ही देवास जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार जिला परियोजना समन्वयक अजय मिश्रा को सौंपा गया है. जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है.
व्यवस्था पर उठे सवाल
देवास का यह मामला न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निगरानी के अभाव में सरकारी योजनाओं का किस तरह दुरुपयोग हो सकता है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्कूलों की बदहाल स्थिति प्रशासनिक तंत्र की बड़ी विफलता को उजागर करती है. अब देखना होगा कि जांच के अंतिम निष्कर्ष के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग पाती है या नहीं.