हरदा जिले में गोहत्या के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए 60 वर्षीय रामदास कोरकू की शनिवार रात मौत हो गई है। उनके बेटे ने आरोप लगाया है कि पुलिस की प्रताड़ना से परेशान होकर रामदास ने टिमरनी थाने में जहर खा लिया, जिससे उनकी जान चली गई। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है। गोवंश की मौत के मामले में चल रही थी जांच
यह मामला 26 अप्रैल को टिमरनी थाना क्षेत्र के ग्राम छिदगांवमेल में सामने आया था। गंजालेश्वर आश्रम से पांच गौवंशीय पशुओं को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया गया था, जिससे ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए पांच टीमें गठित की थीं और संदिग्धों से पूछताछ कर रही थी। इसी क्रम में ग्राम पिपल्याकला निवासी रामदास पिता ओंकारदास कोरकू (60) को भी शनिवार सुबह पूछताछ के लिए टिमरनी थाने बुलाया गया था। शनिवार को एसपी शशांक मिश्रा ने भी पूछताछ की थी। अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
देर रात रामदास की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मृतक रामदास का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे कह रहे हैं कि उन्होंने पूरे जीवन गोसेवा की है, लेकिन बुढ़ापे में उन्हें यह आरोप मिला है। मृतक के बेटे भवानी ठाकुर ने आरोप लगाया है कि उनके पिता ने टिमरनी पुलिस थाने में जहर खाया था। उनके अनुसार, पुलिस बार-बार उनके पिता को पूछताछ के लिए बुलाकर परेशान कर रही थी, जबकि वे वर्षों से गायों की सेवा कर रहे थे। इसी परेशानी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। पुलिस बोली- थाने में नहीं बाहर खाया था जहर वहीं, टिमरनी एसडीओपी आकांक्षा तलैया ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने बताया कि रामदास ने थाने के अंदर नहीं, बल्कि बाहर जहर खाया था। उनके मुताबिक, घटना को लेकर करीब 20-22 लोगों से पूछताछ की जा रही थी और रामदास को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। एसडीओपी के अनुसार, पूछताछ के बाद शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच रामदास किसी व्यक्ति से 100 रुपये उधार लेकर चाय पीने का कहकर हरदा रोड की ओर गए थे। वहीं उन्होंने किसी जहरीली दवा का सेवन किया। रात करीब 8 बजे वे थाने के सामने बने आगंतुक शेड में बेहोशी की हालत में मिले। इसके बाद पुलिस उन्हें तत्काल टिमरनी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। रविवार सुबह जिला अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। पुलिस के अनुसार, आश्रम के सेवादारों और ग्रामीणों समेत कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिनमें रामदास भी शामिल थे। परिवार बोला- घटना के दिन गांव में नहीं थे
मृतक के बेटे भवानी ठाकुर का कहना है कि जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन उनके पिता गांव में मौजूद ही नहीं थे। पुलिस पिछले चार दिनों से सुबह 11 बजे से रात 12 बजे तक उन्हें पूछताछ के लिए बुला रही थी, जिससे वे परेशान थे और इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। पुलिस पिछले चार दिनों से उनके पिता को लगातार पूछताछ के नाम पर बुला रही थी और लंबे समय तक थाने में बैठाए रखती थी।
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