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Ujjain News: वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 5 मई को सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि की समापन 6 मई को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगा, इसलिए उदयातिथि के अनुसार संकष्टी चतुर्थी (एकदंत चतुर्थी) का व्रत 5 मई को ही रखा जाएगा.
उज्जैन. धार्मिक ग्रंथों में हर तिथि और वार का अपना विशेष महत्व बताया गया है लेकिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का स्थान अत्यंत खास माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु संकष्टी चतुर्थी (एकदंत चतुर्थी) का व्रत रखकर भगवान गणेश की आराधना करते हैं. गणपति जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना गया है, इसलिए यह दिन उनकी कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर होता है. मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. सच्चे मन से पूजा करने पर हर बाधा समाप्त होती है. आइए जानते हैं उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से कि इस बार यह चतुर्थी कब पड़ रहा है और किन उपायों से विशेष फल प्राप्त किया जा सकता है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 05 मई को सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी जबकि इस तिथि की समाप्ति 6 मई को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगी. उदयातिथि के मुताबिक, संकष्टी चतुर्थी का व्रत 05 मई को ही रखा जाएगा. इस दिन चंद्रोदय रात 10 बजकर 38 मिनट पर होगा.
चंद्र दोष से मिलती है मुक्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन भगवान गणपति की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और इच्छित फल की प्राप्ति होती है. श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का संचार करती है. ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन का खास महत्व बताया गया है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी कुंडली में चंद्र संबंधित दोष होते हैं. इस दिन व्रत और विधिपूर्वक पूजा करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
जरूर करें ये उपाय
संकष्टी चतुर्थी का दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है. इस पावन अवसर पर किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. अगर बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता, तो इस रात गणेश जी के सामने शांत मन से बैठकर गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें. मान्यता है कि इससे बुद्धि, एकाग्रता और निर्णय क्षमता में अद्भुत सुधार होता है. वहीं सफलता और आर्थिक मजबूती के लिए भी यह दिन बेहद शुभ है. रात में पूजा के बाद मिट्टी का दीपक लें, उसमें शुद्ध घी डालें और चार लौंग के साथ जलाएं. इसके बाद 21 दूर्वा अर्पित कर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें. ऐसा करने से बाधाएं कम होती हैं और धन से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है.
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ
इस दिन संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इससे जीवन में बार-बार आने वाले संकट दूर होते हैं और सुख-शांति का मार्ग खुलता है. संकष्टी चतुर्थी पर लाल, पीले या हरे रंग के वस्त्र धारण करना भी शुभ माना गया है क्योंकि ये रंग भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय हैं और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.