बीजेपी की प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले संगठन में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। इस बार कार्यसमिति का आकार काफी छोटा किया जा रहा है, जिससे नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बैठाना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन गया है। ओरछा में इसी महीने प्रस्तावित बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले संगठन में सदस्यों के चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी संविधान के अनुसार कार्यसमिति को सीमित करते हुए केवल 106 सदस्यों तक रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी कुल का अधिकतम 30 प्रतिशत रखने का फार्मूला तय किया गया है। यानी ऐसे सदस्यों की संख्या 32 से अधिक नहीं होगी। यह बदलाव पिछले कार्यकालों की तुलना में बड़ा माना जा रहा है। दरअसल, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों वीडी शर्मा, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह के समय कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया था। खासकर वीडी शर्मा के कार्यकाल तक आते-आते कार्यसमिति, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित मिलाकर कुल 463 सदस्यों की हो गई थी। जिलों का प्रतिनिधित्व बना मुश्किल प्रदेश में बीजेपी के 62 संगठनात्मक जिले हैं। ऐसे में 106 सदस्यों की सीमा के चलते एक जिले से दो प्रतिनिधि भी शामिल करना संभव नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं को नामों के चयन में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। मौजूदा कार्यसमिति की स्थिति: क्षेत्रीय, जातीय संतुलन बड़ी चुनौती नई कार्यसमिति में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चयन किया जाएगा। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। बड़े शहरों का दबदबा इस बार कार्यसमिति का आकार छोटा होने से इन जिलों का प्रतिनिधित्व भी घट सकता है, जिससे संगठन में नई राजनीतिक समीकरण बनते नजर आएंगे। मौजूदा कार्यसमिति में बड़े शहरों का प्रभाव ज्यादा है। प्रमुख जिलों में सदस्य संख्या ये है –
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