Rewa News: रीवा के कठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में कृषि वैज्ञानिक टीके सिंह ने बताया कि यहां अमरूद की 80 प्रजातियों पर शोध हो रहा है. इनमें सबसे फेमस रीवा का धारीदार अमरूद है. इस वैरायटी को पुराने बाग से चुनकर विकसित किया गया है. मध्य प्रदेश सरकार ने इसे स्टेट वैरायटी रिलीज कमेटी के जरिए अप्रूव किया है. रीवा के लिए यह गर्व की बात है कि यहां के सुंदरजा आम के बाद अब अमरूद को भी पहचान मिल रही है.
रीवा के खास अमरूद की प्रजाति
रीवा का कठुलिया फल अनुसंधान केंद्र आमों के बागीचे के नाम से जाना जाता है. यहां आम्रपाली, सुंदरजा, दशहरी, लंगड़ा, मल्लिका, बेंगलुरु, चौसा, बॉम्बे ग्रीन जैसी कई किस्मों के आम उपलब्ध हैं. लेकिन, इस अनुसंधान केंद्र में एक बाग ऐसा भी है, जहां अमरूद की 80 से ज्यादा वैरायटियों पर शोध हो रहा है. इनमें से एक खास अमरूद है, जिसका नाम धारीदार है.
रीवा के फल अनुसंधान केंद्र में विकसित धारीदार अमरूद की मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में काफी डिमांड है. इसकी मिठास अन्य अमरूदों से अलग होती है. जानकार बताते हैं कि धारीदार अमरूद का वजन लगभग 250 से 500 ग्राम तक होता है. ठेकेदार किसान अनुसंधान केंद्र आकर इसकी बोली लगाते हैं और फिर बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति किलो में बेचते हैं.
7 साल का एक पेड़ प्रतिवर्ष देता 1 क्विंटल अमरूद
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि धारीदार अमरूद का एक पेड़ अगर 7 साल का है तो प्रत्येक सीजन में लगभग 1 क्विंटल फल देता है. फ्लॉवरिंग से फल बनने तक इस फल को तैयार होने में लगभग 125 दिन लगते हैं. इसके फल अप्रैल तक चलते हैं, जिससे किसानों को काफी मुनाफा होता है.
5 डिग्री ब्रिक्स TSS
धारीदार अमरूद का TSS यानी मिठास 11.05 डिग्री ब्रिक्स होता है, जिससे यह अमरूद सबसे ज्यादा मीठा माना जाता है. वर्तमान में ठंड का सीजन है और इन दिनों धारीदार अमरूद सहित अन्य अमरूदों की काफी डिमांड है. रीवा के फल अनुसंधान केंद्र में लगभग 17 एकड़ भूमि में अमरूद का उत्पादन हो रहा है. जिसमें 1300 पुराने पौधे हैं, जबकि 740 नए पौधे लगाए गए हैं. हाल में एक साल के लिए 1300 पौधों का ऑक्शन किया गया था, जिससे लगभग 6 लाख 51 हजार रुपये अनुसंधान केंद्र को प्राप्त हुए थे.