नाचते-गाते कलेक्टर दफ्तर आए गांव वाले, ये जश्न नहीं…विरोध का उत्सव

नाचते-गाते कलेक्टर दफ्तर आए गांव वाले, ये जश्न नहीं…विरोध का उत्सव


मध्य प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम जोरावरपुरा के ग्रामीणों ने मंगलवार को अनोखे अंदाज में अपनी पीड़ा जताई. ढोल-ढमाकों की थाप पर गणपति बप्पा मोरया के नारे लगाते हुए वे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और वहां जमकर नाचे–गाए लेकिन यह जश्न नहीं था, यह था विरोध का उत्सव. ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जोरावरपुरा को राजस्व ग्राम घोषित करने, गांव में मुक्तिधाम निर्माण, पीने के पानी, नाली निर्माण, सीसी रोड और स्कूल की बाउंड्री जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की.

ग्रामीणों का कहना है कि 1100 से 1500 की आबादी वाला उनका गांव, जहां अधिकांश बंजारा समाज के लोग रहते हैं, आजादी के इतने साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. यहां तक कि अंतिम संस्कार के लिए भी उन्हें कोई उचित स्थान नहीं मिला. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत सेमली मेवाड़ लगातार भेदभाव कर रही है. पंचायत के खाते में स्कूल और अन्य निर्माण कार्यों के लिए लाखों रुपये पड़े होने के बावजूद कोई काम नहीं हो रहा है.

गांव वालों ने बताया कि गणेश विसर्जन के दौरान गांव की सड़कों पर भारी कीचड़ था. इसी कीचड़ में उन्होंने नाच-गाकर अपनी नाराजगी जाहिर की और वही अंदाज लेकर कलेक्टर कार्यालय भी पहुंचे ताकि वे अपनी उपेक्षा को सत्ता के गलियारों तक पहुंचा सकें. ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह पर भी भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए और कहा कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.



Source link