खरगोन में नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। बालिकाएं, युवतियां और महिलाएं गुजराती गरबा की प्रैक्टिस कर रही हैं। इसके साथ ही बंगाली, राजस्थानी और आदिवासी गरबा का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
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गरबा प्रैक्टिस में ‘पंखिड़ा रे उड़ी न जाजो पावागढ़ रहे’, ‘ढोलिड़ा-ढोलिड़ा’ और ‘तारा बिना श्याम’ जैसे गुजराती गीतों की धुनें गूंज रही हैं। नवदुर्गा उत्सव समिति ज्योतिनगर के अध्यक्ष इंजी. नीतिन मालवीय ने बताया कि माता तारारानी के दरबार में गरबा पांडाल सजाया जा रहा है।
समिति के सदस्य दिलीप सोनी के अनुसार, डांडिया के अलावा विभिन्न प्रकार के गरबा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें ताली, थाली, फूल, मटकी और छाते से किए जाने वाले गरबा शामिल हैं। प्रतिदिन 4 घंटे का प्रशिक्षण चल रहा है। नवरात्रि पर्व 22 सितंबर से प्रारंभ होगा।
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