Success Story: इंजीनियर की नौकरी छोड़, पानी में ढूंढा सोना…नंदकिशोर पटेल ने लिखी करोड़ों की कहानी

Success Story: इंजीनियर की नौकरी छोड़, पानी में ढूंढा सोना…नंदकिशोर पटेल ने लिखी करोड़ों की कहानी


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Nandkishor Patel Success Story: नंदकिशोर कहते हैं कि अगर आप पानी में सोना ढूंढना चाहते हैं, तो पहले तालाब में उतरने की हिम्मत रखिए. आज उनके तालाबों में सिर्फ मछलियां ही नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और सपनों की चमक भी तैरती है जो हर युवा को यह संदेश देती है कि “जो सोच लेता है, वही कर दिखाता है.

सफलता हमेशा उसी को मिलती है जो जोखिम उठाने की हिम्मत रखता है. खंडवा जिले के सुरगांव जोशी गांव के रहने वाले नंदकिशोर पटेल आज “फिश किंग” के नाम से जाने जाते हैं. एक समय था जब वे एक इंजीनियर के रूप में नौकरी कर रहे थे, लेकिन आज वे मछली पालन के कारोबार से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. उनकी कहानी सिर्फ मेहनत की नहीं, बल्कि सोच बदलने की भी मिसाल है.
नंदकिशोर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव से पूरी की और इसके बाद आईपीएस कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें एक निजी कंपनी में 50 हजार रुपये महीने की नौकरी मिल गई. कुछ साल तक उन्होंने नौकरी की, लेकिन उनके मन में हमेशा कुछ अलग करने की चाहत थी. वे चाहते थे कि वे खुद का कुछ ऐसा काम करें जिससे न केवल वे सफल हों, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे सकें.

नौकरी छोड़कर मछली पालन की शुरुआत
साल 2016 में नंदकिशोर ने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने अपनी स्थिर नौकरी को अलविदा कह दिया और मछली पालन की दिशा में कदम बढ़ाया. गांव के लोग हैरान थे एक इंजीनियर अब तालाबों में मछलियां पालने जा रहा है! लेकिन नंदकिशोर को खुद पर भरोसा था. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ एक तालाब से काम शुरू किया. उन्होंने सरकारी योजनाओं और कृषि विभाग की मदद से फिश फार्मिंग की तकनीक सीखी. धीरे-धीरे उन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान का इस्तेमाल करते हुए ABC मॉडल (एरिएशन, ब्रीडिंग और केयर) के तहत मछली पालन की प्लानिंग की. इससे मछलियों की ग्रोथ तेज हुई और उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई.

चार से पांच तालाब और करोड़ों का टर्नओवर
आज नंदकिशोर पटेल के पास चार से पांच बड़े तालाब हैं, जिनमें वे रोहू, कतला, मृगल और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों की मछलियां पालते हैं. उनका सालाना टर्नओवर करीब 12 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. नंदकिशोर कहते हैं कि अगर सोच सकारात्मक हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी काम में सफलता मिल सकती है. मैंने इंजीनियरिंग की डिग्री जरूर ली, लेकिन असली इंजीनियरिंग मैंने खेतों और तालाबों में की.

तकनीक और वैज्ञानिक तरीका बना सफलता की चाबी
नंदकिशोर मछली पालन में वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. वे तालाबों में ऑक्सीजन स्तर, पानी की क्वालिटी और तापमान को नियंत्रित रखने के लिए एरिएटर मशीन का प्रयोग करते हैं. इसके अलावा वे मछलियों के आहार में संतुलित फीड देते हैं, जिससे वजन और उत्पादन दोनों बढ़ता है.
वे हर बैच के बाद डेटा का विश्लेषण करते हैं कि किस मौसम में कौन सी प्रजाति ज्यादा लाभदायक होती है. इसी प्लानिंग की वजह से वे साल भर तालाबों से कमाई करते हैं.

युवाओं के लिए प्रेरणा
नंदकिशोर पटेल अब खुद कई युवाओं को मछली पालन का प्रशिक्षण दे रहे हैं. वे गांव के बेरोजगार युवाओं को बताते हैं कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर वे भी लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं। आज उनके मार्गदर्शन में दर्जनों युवक मछली पालन से आत्मनिर्भर बन चुके हैं.
वे कहते हैं कि हमने हमेशा सुना कि पढ़े-लिखे लोग नौकरी करते हैं, लेकिन अब वक्त आ गया है कि पढ़े-लिखे लोग खेती और पशुपालन को नया रूप दें। यही असली आत्मनिर्भर भारत की दिशा है.

सरकारी सहयोग से मिला बढ़ावा
नंदकिशोर ने मत्स्य विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ भी उठाया. इस योजना के तहत उन्हें तालाब निर्माण और फिश फीड पर सब्सिडी मिली. इससे उनका खर्च घटा और मुनाफा बढ़ा. अब वे अपने ब्रांड के नाम से ताज़ी और साफ मछलियों की सप्लाई नजदीकी जिलों तक करते हैं.
सफलता का संदेश
नंदकिशोर पटेल की कहानी बताती है कि किसी भी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए. जो काम दिल से किया जाए, वही बड़ी सफलता की ओर ले जाता है. इंजीनियर से फिश किंग बनने का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि मेहनत और नवाचार से गांव में भी करोड़ों की कमाई की जा सकती है.
नंदकिशोर कहते हैं कि अगर आप पानी में सोना ढूंढना चाहते हैं, तो पहले तालाब में उतरने की हिम्मत रखिए. आज उनके तालाबों में सिर्फ मछलियां ही नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और सपनों की चमक भी तैरती है जो हर युवा को यह संदेश देती है कि “जो सोच लेता है, वही कर दिखाता है.

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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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