बड़वानी जिले के अंजड़ नगर से इन दिनों बड़ी संख्या में नर्मदा परिक्रमावासी गुजर रहे हैं। प्रतिदिन अल सुबह से शाम 4 बजे तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु ‘नर्मदे हर’ का जयघोष करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं।
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नगर के सेवाभावी लोग इन परिक्रमावासियों की सेवा में दिन-रात लगे हुए हैं। अंजड़ में कई स्थानों पर भक्तों द्वारा परिक्रमावासियों के रुकने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। नगरवासियों में सेवा कार्यों के प्रति उत्साह देखा जा रहा है।
होटल व्यवसायी भी इस सेवा कार्य में पीछे नहीं हैं। कई दुकानों पर निःशुल्क नाश्ता और चाय उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त, कुछ निजी चिकित्सक परिक्रमावासियों के बीमार होने पर निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
इसी क्रम में, नगर की भावसार धर्मशाला में माँ नर्मदा सेवा समिति द्वारा भी व्यापक सेवा कार्य किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन 100 से 150 परिक्रमावासी पहुंच रहे हैं, जिनके लिए निःशुल्क भोजन और ठहरने की उचित व्यवस्था की गई है।
समिति के योगेश भावसार ने बताया कि परिक्रमावासियों के लिए प्रतिदिन दोनों समय भोजन की व्यवस्था की जाती है। इस सेवा कार्य में सभी समाज की लगभग 15 से 20 महिलाएं और पुरुष मिलकर योगदान दे रहे हैं।

व्यवस्थापक नीलेश भावसार के अनुसार, भावसार धर्मशाला में दोपहर 12 से 1 बजे तक भोजन उपलब्ध रहता है, जिसमें प्रतिदिन 30 से 50 परिक्रमावासी भोजन ग्रहण करते हैं। शाम के समय यह संख्या 80 से 150 तक पहुंच जाती है।
धर्मशाला पहुंचने पर सभी को चाय पिलाई जाती है। भोजन के उपरांत उनके रुकने के लिए उचित व्यवस्था की जाती है, जिसमें सोने के लिए बिछावन और ओढ़ने के लिए रजाई या कंबल शामिल हैं। सुबह उठने पर चाय, बिस्किट और स्नान की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाती है। व्रत या उपवास होने पर उन्हें फल, फ्रूट फलाहारी मिक्चर के अलावा मोरधान या साबूदाने की खिचड़ी की व्यवस्था की जाती है।
सेवा के कार्यो में महिलाएं अग्रणी भावसार धर्मशाला में चल रही सेवा में महिलाएं भी पीछे नही है शाम के समय प्रतिदिन भावसार मोहल्ले की लगभग 8 से 10 महिलाएं परिक्रमा वासियों के लिए गरमा गरम भोजन बनाकर तैयार कर रही है यहां हरदिन सब्जी, रोटी व दाल चांवल तो बनाये जाते तो किसी दिन दालबाटी, किसी दिन मक्का की रोटी तो किसी दिन कड़ी खिचड़ी बनाकर कर खिलाई जा रही है। इसके अलावा सेवा भावी लोग अपने जन्मदिवस, वैवाहिक वर्षगांठ या अपने परिजनों की पुण्यतिथि पर एक दिन का भोजन परिक्रमवासियो को करवा रहे है। साथ ही पूरे नगरवासियो की और से भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओ में अच्छा सहयोग मिल रहा है।
सेवा देख अभिभूत होते है परिक्रमावासी महाराष्ट्र के धूलिया से आई संगीता ने बताया कि मैने ओम्कारेश्वर से परिक्रमा उठाई है यहां की सेवा देख कर हम आश्चर्य चकित है निमाड में हमे सभी का बहुत स्नेह मिल रहा है यहां छोटे-छोटे बच्चे भी प्रेम से नर्मदेहर बोलते है जिससे हमें और अधिक ऊर्जा मिलती है तथा थकान दूर हो जाती है।
वही महाराष्ट्र के पालघर से आई शीतल अहिराव और जागृति ने बताया कि पदयात्रा का आज नौवां दिन है अभी तक हमे कोई कमी महसूस नही हुई यहां घर से भी अच्छा भोजन मिल रहा है तथा निमाड वासियों में बहुत प्रेम भरा है व यहां का संस्कार भी बहुत अच्छा है बच्चो से लेकर बड़े बुजुर्ग तक सभी नर्मदेहर बोलकर अपनी सेवाए दे रहे है।