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बालाघाट में एक ऐसा समाजसेवी है, जो न सिर्फ अपने गांव के बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवा रहा बल्कि आसपास के बुजुर्गों को भी भगवान के दर्शन करा कर पुण्य कमा रहा है.
वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा कराने की सरकार की तरफ से कई योजनाएं संचालित होती है. इसमें कई तरह के नियम होते हैं, जिससे कई बुजुर्ग इस योजना से वंचित रह जाते हैं. बालाघाट में एक ऐसा समाजसेवी है, जो न सिर्फ अपने गांव के बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवा रहा बल्कि आसपास के बुजुर्गों को भी भगवान के दर्शन करा कर पुण्य कमा रहा है. इसमें भी एक अनोखी स्कीम है, जिसमें बुजूर्ग किसानों को लॉटरी सिस्टम के जरिए तीर्थ यात्रा का मौका दे रहा है. यह स्कीम बालाघाट के जराहमोहगाव नाम के गांव में रहने वाले डहरवाल परिवार ने शुरू की है.
ऐसे ख्याल अनोखी योजना का ख्याल
बालाघाट के जराहमोहगाव नाम के गांव में रहने वाले नागेंद्र डहरवाल हाल ही में रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या नगरी गए हुए थे. ऐसे में दर्शन करते हुए उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न अपने गांव के लोगों को वह रामलला के दर्शन करवाए. इसके बाद गांव आए और अपने भाइयों के साथ अपने ख्याल को साझा किया. इसके बाद उनके दोनों भाइयों दीपक डहरवाल और शारदा डहरवाल के साथ योजना बनाई की गांव के बुजुर्गों को रामलला के दर्शन करवाएं. इसके बाद उन्होंने एक पोस्टर बनवाया और गांव के चौराहों लगवाएं.
लॉटरी सिस्टम से गांव के लोगों को दे रहे सुविधा
हम गांव में एक लॉटरी सिस्टम के माध्यम से किसानों और बुजुर्गों को योजना का लाभ देने के बारे योजना बनाई. इसके रजिस्ट्रेशन शुरू किया. अब तक 500 से ज्यादा लोगों के रजिस्ट्रेशन हो चुके है. ऐसे में ग्रामीणों में भी इस योजना को लेकर उत्साह है. वह साल भर में दो बार इस योजना के तहत अयोध्या में रामलला के दर्शन करवाएंगे, जिसमें वह आने-जाने, खाने-पीने सहित रहने का खर्च वहन करेंगे.
पहली बार में रवाना हुए 21 यात्री
अब गांव के मंदिर में लक्की ड्रा के जरिए 21 लोगों का चयन अयोध्या के लिए किया गया. जिन लोगों का चयन हुआ उनमें किसान भाइयों के साथ एक बच्चा भी शामिल है. इन सभी धर्म प्रेमी किसान भाइयों को नागेंद्र अपने साथ अयोध्या प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए लेकर रवाना हुए है.नागेंद्र डहरवाल सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ एक समाजसेवी भी है. तीर्थ यात्रियों को हरी झंडी दिखाकर लोगों को रवाना किया है.