झाबुआ जिले के सजेली नान्या के जंगलों में बड़े पैमाने पर गौहत्या का खुलासा होने के बाद यह मुद्दा गरमा गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने झाबुआ में कलेक्टर-एसपी के सामने विरोध दर्ज कराने के बाद, संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों ने इंदौर में कमिश्नर और
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इस बीच, प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम की ओर से वन क्षेत्र में व्यापक स्तर पर गहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। पूरे वन क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटा गया है और सघन तलाशी ली जा रही है। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों की सहायता से भी एडवांस सर्चिंग की जा रही है। जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या साक्ष्य को चिह्नित किया जा सके। शुक्रवार को कलेक्टर नेहा मीना और पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवदयाल सिंह ने संबंधित वन क्षेत्र का दौरा कर आवश्यक निर्देश दिए थे।
यह खुलासा 7 दिसंबर को की गई दबिश में हुआ था, जब पता चला कि जंगल में 40 से 50 अलग-अलग अड्डे बनाकर झोपड़ियों और पेड़ों के नीचे अवैध कत्लखाने संचालित किए जा रहे थे।
कत्लखानों में 500 रुपए किलो बिक रहा था गोमांस
ज्ञापन में विहिप ने बताया कि इन कत्लखानों में गोमांस को मंडियों की तरह सजाकर रखा गया था। मिले रजिस्टर के अनुसार, इसे 500 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा था। विहिप ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये कत्लखाने “सेवा के नाम पर आदिवासियों का धर्मांतरण करने वाले प्रोटेस्टेंट ईसाइयों के चर्च के संरक्षण में चल रहे थे।” संगठन ने इस घटना को केवल सुरक्षा में चूक नहीं, बल्कि प्रशासनिक सिस्टम की विफलता करार दिया।
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष आजाद प्रेमसिंह ने जानकारी दी कि ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि झाबुआ जिले के सारंगी पशु बाजार के साथ-साथ धार जिले के कानवन, राजगढ़ और सरदारपुर जैसे पशु बाजारों से भी अवैध स्लाटर हाउस को गोमांस की आपूर्ति हो रही है। संगठन ने इन बाजारों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में स्वामी अच्यूतानंदजी, क्षेत्रीय गोरक्षा प्रमुख विहिप मप्र-छत्तीसगढ़ सोहन विश्वकर्मा, भारतीय गोवंश रक्षण संवर्धन न्यास ट्रस्ट के गिरधारीलाल कुमावत, बजरंग दल विभाग संयोजक धार विजय शर्मा, विभाग गोरक्षा प्रमुख प्रवीण दरेकर, योगेश होलानी और तनू शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।