साग ऐसा जिससे बढ़ता हीमोग्लोबिन, लीवर के लिए वरदान! गांववालों की सेहत का यही राज

साग ऐसा जिससे बढ़ता हीमोग्लोबिन, लीवर के लिए वरदान! गांववालों की सेहत का यही राज


सर्दियों का मौसम आते ही लोग सेहत बनाने के लिए हरी सब्जियों और साग का सेवन बढ़ा देते हैं. लेकिन गांव-देहात और आदिवासी इलाकों में एक ऐसा साग खाया जाता है, जिसे लोग आज भी सेहत का गुप्त राज मानते हैं. इस साग का नाम है कुटई. इसे अलग-अलग इलाकों में घुमा, द्रोण, पुष्पद्रोण, कुटई या कटाई भी कहा जाता है. नाम अलग हो सकता है, लेकिन इसके फायदे हर जगह एक जैसे हैं.

जंगलों से थाली तक, आदिवासियों की ताकत

बघेलखंड और आसपास के इलाकों में जंगलों की कोई कमी नहीं है. इन्हीं जंगलों में कई ऐसी जड़ी-बूटियां और पत्तेदार साग मिलते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ गांव और आदिवासी समाज को ही है. यही वजह है कि ये लोग आज भी अंग्रेजी दवाओं से ज्यादा प्राकृतिक और आयुर्वेदिक खानपान पर भरोसा करते हैं. कुटई का साग भी उन्हीं में से एक है, जो सर्दियों में सबसे ज्यादा खाया जाता है.

स्वाद भी, सेहत भी

कुटई का साग जितना खाने में स्वादिष्ट होता है, उतना ही यह सेहत के लिए फायदेमंद भी है. गांवों में इसे साधारण तरीके से पकाया जाता है, फिर भी इसके पोषक तत्व कम नहीं होते. आयुर्वेद के जानकार भी इस साग को सर्दियों में जरूर खाने की सलाह देते हैं.

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय

रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि कुटई का साग आयुर्वेदिक पोषक तत्वों का खजाना है. उनके अनुसार, इसमें विटामिन A, B, C, भरपूर मात्रा में आयरन, मिनरल्स और फाइबर पाए जाते हैं. इसका नियमित सेवन शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है और कमजोरी दूर करता है.

पेट, हड्डी और लीवर के लिए रामबाण

डॉ. कुलश्रेष्ठ के मुताबिक, कुटई के साग में मौजूद फाइबर पेट से जुड़ी समस्याओं में काफी लाभ पहुंचाता है. इसका सेवन हड्डियों को मजबूत करता है और लीवर के लिए इसे विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है. लीवर से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को इसका सेवन करने से अच्छा असर देखने को मिलता है.

घास समझकर कर देते हैं नजरअंदाज

अक्सर लोग कुटई को घास-फूस समझकर छोड़ देते हैं, यही वजह है कि बाजारों में यह बहुत कम दिखाई देता है. लेकिन पोषण के मामले में यह बथुआ, पालक और मेथी से भी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. यह साग मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में पाया जाता है.

गांव जाएं तो जरूर चखें

अगर आप गांव जाते हैं या गांव में रहते हैं, तो कुटई का साग जरूर खाएं. यह सिर्फ एक साग नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही देसी सेहत की विरासत है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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