Balaghat Interesting Fact News: मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला एक ऐसा जिला है, जो प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है. बालाघाट में तमाम तरह की चीजें मौजूद है, जो इसे एमपी के दूसरे जिलों से अलग बनाती है. एक दौर था जब जिले को सिर्फ नक्सलवाद के लिए एमपी में जाना जाता था. लेकिन जिले की पहचान सिर्फ नक्सलवाद तक ही सीमित नहीं थी. दरअसल, बालाघाट पहाड़, जंगल और खनिज की धरती है. यह अपनी सीमाएं दो राज्यों (महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) से साझा करता है. ऐसे में यहां पर दो राज्यों की संस्कृति भी देखने को मिलती है. ऐसे में हम आपको ऐसे कुछ रोचक तथ्य बताएंगे, जिसे सुन आप हैरान हो जाएंगे. इतना ही नहीं बालाघाट आने की उत्सुकता भी बढ़ जाएगी.
लोकल 18 बालाघाट को समझने और जानने के लिए पर्यावरण प्रेमी और वरिष्ठ पत्रकार हरीश लिल्हारे से बातचीत की और समझने की कोशिश की बालाघाट कितना खास है. वरिष्ठ पत्रकार हरीश लिल्हारे बताते हैं जिले में करीब 53% भूभाग पर वन है. वहीं, यह सतपुड़ा की पहाड़ियों से घिरा हुआ है. ऐसे में उन पहाड़ियों पर बारह घाट है. इसी के चलते जिले का नाम बालाघाट पड़ गया.
जिले में है खनिज का भंडार
बालाघाट जिला राज्य और देश को राजस्व देने में भी पीछे नहीं है. दरअसल, यहां पर देश की सबसे ज्यादा तांबा उत्पादन करने वाली खदान है. इसे मलाजखंड तांबा खदान कहा जाता है. यहां से करीब 60 प्रतिशत तक तांबे का उत्पादन होता है. इतना ही नहीं भारत का 80 प्रतिशत मैंगनीज उत्पादन बालाघाट में होता है. बालाघाट के भरवेली में एशिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड मैंगनीज खदान है. भरवेली के अलावा तिरोड़ी, उकवा, रमरमा सहित कई छोटी बड़ी खदानें मौजूद है.
बालाघाट में वनों का घनत्व और क्षेत्रफल
अगर मध्य प्रदेश के लिहाज से बात की जाए, तो यहां पर जंगल करीब 53 प्रतिशत भूभाग पर है. यहां पर साल, सागौन और बांस के जंगल है. इसके अलावा महुआ, तेंदू, साजा, बीजा सहित कई तरह के पेड़ पाएं जाते हैं, जो इसे मिश्रित वन बनाते हैं. ये वन्य प्राणी के घर भी है. ऐसे में यहां पर कान्हा नेशनल पार्क, सोनेवानी वन्यजीव क्षेत्र भी है. ऐसे में यहां पर दूर-दराज के लोग भी आते हैं.
सतपुड़ा के पहाड़ बनाते हैं जिले को खास
बालाघाट जिले में वनों के साथ सतपुड़ा के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ मौजूद है. यहीं वजह है कि यहां पर कई सारे झरने बनते हैं. ये पर्वत गांगुलपारा झरना, सतनारी, दुगलई, रमरमा सहित कई सारे झरनों का निर्माण करते हैं. ये पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं.
धान की सुगंध महकता है बालाघाट
बालाघाट जिले में धान का रकबा पूरे एमपी में सबसे ज्यादा है. वहीं, उत्पादकता भी सबसे ज्यादा है. इसलिए इसे धान का कटोरा भी कहते हैं. वहीं, यहां पर हर किस्म का धान उगाया जाता है लेकिन चिन्नौर की बात ही अलग है. दरअसल, चिन्नौर बालाघाट की पहचान बन चुका है. बालाघाट को चिन्नौर के लिए जीआई टैग भी मिल चुका है.
उड़ती चिड़िया जैसा नक्शा दो राज्यों की सीमा से मिलन
बालाघाट का नक्शा देखेंगे तो महसूस करेंगे कि इसका नक्शा उड़ती हुई चिड़िया जैसा है. वहीं, यह दो राज्यों से अपनी सीमाएं साझा करता है. इसमें छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र शामिल है. कटंगी, खैरलांजी, किरनापुर और लांजी के कुछ हिस्सों में महाराष्ट्र का कल्चर देखने को मिलता है. वहीं, लांजी, मलाजखंड, बैहर और परसवाड़ा वाले इलाके में छत्तीसगढ़ी कल्चर देखने को मिलता है.