श्रीराम ने भी रखा था ये व्रत, फाल्गुन की पहली एकादशी का शुभ मुहूर्त-पूजा विधि

श्रीराम ने भी रखा था ये व्रत, फाल्गुन की पहली एकादशी का शुभ मुहूर्त-पूजा विधि


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Vijaya Ekadashi 2026: आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि विजया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लें. पूजा के समय भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए क्योंकि यह रंग उन्हें बेहद प्रिय है. भगवान हरि के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें. इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ होता है.

उज्जैन. हिंदू धर्म में हर तिथि और हर व्रत का अपना विशेष महत्व माना गया है. पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं, यानी हर महीने दो एकादशी, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. फाल्गुन माह की पहली एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है, जो कृष्ण पक्ष में पड़ती है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है और व्रत रखने का बड़ा महत्व माना जाता है. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि इस साल विजया एकादशी कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है.

उन्होंने लोकल 18 से कहा कि वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष में विजया एकादशी की तिथि 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार इस वर्ष 13 फरवरी 2026 को विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा. वहीं अगर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की बात की जाए, तो सुबह 6 बजकर 48 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगा. इस समय में पूजा करने से व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है.

श्रीराम ने भी रखा था विजया एकादशी व्रत
उन्होंने आगे कहा कि विजया एकादशी का नाम ही इसकी महिमा को स्पष्ट करता है. धार्मिक शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान राम ने भी लंका विजय से पहले इस पावन एकादशी का व्रत किया था, जिसके बाद उन्हें विजय प्राप्त हुई. यही कारण है कि यह एकादशी जीत, सफलता और आत्मबल का प्रतीक मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय मिलती है, जीवन की कठिनाइयों का समाधान मिलता है और राहें आसान होती हैं. साथ ही यह व्रत आत्मशुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है और पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है.

एकादशी व्रत के दिन क्या करें?
आचार्य ने बताया कि एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत संकल्प लें. पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए क्योंकि यह रंग भगवान श्रीहरि का प्रिय माना जाता है. भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें. इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.

जरूर रखें इन बातों का ध्यान 
एकादशी व्रत के दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए. एकादशी का व्रत नहीं रखने वालों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. एकादशी व्रत के दिन बाल, नाखून और दाढ़ी कटवाने की भूल न करें. एकादशी पर ब्राह्मणों को कुछ दान अवश्य करना चाहिए. व्रत के पारण करने के बाद अन्न का दान करना शुभ माना गया है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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श्रीराम ने भी रखा था ये व्रत, फाल्गुन की पहली एकादशी का शुभ मुहूर्त-पूजा विधि

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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