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Mahakal Mandir Shiv Navratri: 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल उज्जैन में ही महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव नवरात्रि मनाई जाती है. इस दौरान नौ दिन तक नौ तरह के श्रृंगार किए जाते हैं, जिसे देखने भक्त दूर-दूर से आते हैं. इसी कड़ी में नौवें दिन उज्जैन के राजा शिव तांडव स्वरूप में दर्शन देंगे.
उज्जैन. विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में हर उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ सबसे पहले बनाने की परम्परा है, जो इसकी अनूठी धार्मिक परंपरा को दर्शाता है. जहां पूरे देश में नवरात्रि मनाई जाती है, वहीं महाकाल की पावन नगरी में शिव नवरात्रि का भी विशेष महत्व है. मंदिर में बाबा महाकाल प्रतिदिन अलग-अलग आरती और श्रृंगार में दर्शन देते हैं, लेकिन शिव नवरात्रि के दौरान उनका स्वरूप और भी अलौकिक हो जाता है. इस दिव्य श्रृंगार को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु देशभर से उज्जैन पहुंचते हैं.
मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि इस वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि यानी 6 फरवरी से शिव नवरात्रि आरंभ हो चुकी है. इन नौ दिनों में बाबा महाकाल प्रतिदिन नए रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. इसी क्रम में नवे दिन उज्जैन के राजा शिव तांडव के भव्य स्वरूप में प्रकट होंगे, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा.
क्या होता है शिव तांडव स्वरूप मे खास?
भगवान महाकाल के जितने भी श्रृंगार होते हैं. सबका अलग ही महत्व रहता है. नौवें दिन भगवान महाकाल अपने भक्तों को शिव तांडव रूप में दर्शन देते हैं. शिव तांडव जो नत्य है, इसमें भगवान घटाटोप के ऊपर प्रतिमा को विराजित करते हैं. इसके बाद वस्त्र धारण कराते हैं और शिव तांडव रूप में श्रृंगारित किया जाता है. उसके बाद भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं. यह श्रृंगार इतना मनमोहक होता है जो भी इसके दर्शन करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं. इसलिए देश विदेश से श्रद्धालु महाकाल भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं.
शिवनवरात्रि में दर्शन का है विशेष महत्त्व
बहुत सारे लोग शिवरात्रि पर व्रत रखते हैं या शिव का विशेष पूजन आदि करते हैं. वो अगर शिवनवरात्रि में आकर भगवान महाकाल का दर्शन पूजन कर लें तो उस भक्त को शिवरात्रि के महत्व के बराबर बाबा के दर्शन का आशिवाद मिलता है, इसलिए यहां शिवनवरात्रि मनाई जाती है.
आज होल्कर स्वरूप मे देंगे बाबा दर्शन
11 फरवरी यानि आज भगवान महाकाल अपने भक्तो को होल्कर स्वरूप मे दर्शन देंगे. यह श्रंगार कोई आम नहीं होता बल्कि इस श्रृंगार का महत्व भी खास होता है. यह श्रृंगार होलकर स्वरूप में इसलिए होता है, क्योंकि महाकालेश्वर भगवान उज्जैन के राजा हैं. इस श्रृंगार के लिए सामग्री होलकर घराने से आती है, इसलिए बाबा का होल्कर श्रृंगार होता है.
साथ ही इस दिन भक्तों द्वारा बाबा को अर्पित की गई वस्तुओं से बाबा को रूप दिया जाता है. भगवान महाकाल का होलकर श्रंगार रूप बेहद अद्भुत और भव्य है. हर साल महाकाल का यह विशेष शृंगार किया जाता है. बाबा महाकाल के इस रूप के दर्शन करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्त आते हैं.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें