महाशिवरात्रि पर पूजा के पहले चेक कर लीजिएगा डलिया, भूल से भी न आया हो ये फूल, महादेव को चढ़ गया तो अनर्थ!

महाशिवरात्रि पर पूजा के पहले चेक कर लीजिएगा डलिया, भूल से भी न आया हो ये फूल, महादेव को चढ़ गया तो अनर्थ!


Last Updated:

Mahashivratri News: महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर श्रद्धालु भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक किया जाता है और भगवान को दूध, दही, जल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पवित्र वस्तुएं अर्पित की जाती हैं. लेकिन, भूल से भी ये फूल अर्पित मत कर दीजिएगा. जानें सब

Ujjain News: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है. इसे शिव उपासना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. यह तिथि भोलेनाथ के भक्तों के लिए विशेष फलदायी होती है, क्योंकि इस दिन की गई आराधना शीघ्र शुभ परिणाम देती है. इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को आ रही है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अत्यंत दयालु और सहज स्वभाव के हैं. वे मात्र एक लोटा जल अर्पित करने से भी प्रसन्न हो जाते हैं.

वहीं, शिव पूजन में कई प्रकार के पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जिनमें से कुछ महादेव को अत्यंत प्रिय हैं. हालांकि, शास्त्रों में कुछ ऐसे फूलों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना वर्जित माना गया है. आइए उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि वह कौन-सा फूल है, जिसे महादेव को भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए.

पौराणिक कथा में उल्लेख 
शिव पुराण की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और पालनकर्ता भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर मतभेद हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. यह विवाद इतना गहरा हो गया कि अंततः मामला स्वयं महादेव तक पहुंचा. तब भगवान शिव ने अपनी दिव्य शक्ति से एक विशाल और अनंत शिवलिंग प्रकट किया और दोनों से कहा कि जो इसका आदि और अंत खोज लेगा, वही सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा. इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ब्रह्माजी नीचे की दिशा में गए और विष्णुजी ऊपर की ओर बढ़े, लेकिन अनंत प्रयासों के बावजूद वे शिवलिंग का अंत नहीं पा सके. अंततः भगवान विष्णु को सत्य का आभास हुआ और उन्होंने महादेव के समक्ष नतमस्तक होकर अपनी भूल स्वीकार की, जिससे शिव की सर्वोच्चता सिद्ध हुई.

बह्माजी की वजह से पुष्प ने बोला झूठ
भगवान विष्णु के हार स्वीकार करने के बाद ब्रह्माजी महादेव के समक्ष लौटे. असंख्य प्रयासों के बावजूद वे भी शिवलिंग का आदि-अंत नहीं खोज पाए थे. निराश होकर वापस आते समय उन्हें मार्ग में केतकी पुष्प दिखाई दिया. अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए ब्रह्माजी ने केतकी को अपनी बात का समर्थन करने के लिए मनाया और उससे झूठी गवाही देने का आग्रह किया. इस प्रकार उन्होंने शिव के सामने झूठ बोलने का निर्णय लिया.

केतकी के फूल को मिला श्राप
ब्रह्माजी के कहने पर केतकी पुष्प भगवान शिव के पास ब्रह्माजी के साथ पहुंचा. ब्रह्माजी ने भगवान शिव से कहा कि उन्होंने अंत ढूंढ लिया है और इसका सबूत यह केतकी का फूल है. भगवान शिव को पता था कि वे झूठ बोल रहे हैं. केतकी के फूल के झूठ बोलने के बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि उसका इस्तेमाल उनकी किसी भी पूजा में नहीं किया जाएगा, इसलिए भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल वर्जित माना जाता है.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

homedharm

महाशिवरात्रि: चेक कर लीजिएगा डलिया, भूल से भी न आया हो ये फूल, चढ़ा तो अनर्थ!

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



Source link