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Rasi Tejaswini Swa sahayata samuh: खेलन बाई का राशि तेजस्विनी स्व सहायता समूह साल 2019 में बना था. इस ग्रुप में 19 महिलाएं हैं. ऐसे में इन महिलाओं को RSETI की मदद से नेचुरल गुलाल बनाने की ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद सभी महिलाओं ने मिलकर हर साल प्राकृतिक रंग बनाने का फैसला किया और वह इस साल प्राकृतिक रंग बनाकर अच्छी कमाई भी कर रही हैं.
Rasi Tejaswini Swa sahayata samuh: होली खेलने की इच्छा हर किसी की होती है लेकिन केमिकल रंगों की वजह से लोगों का होली जैसे त्यौहार से मोहभंग हो जाता है. ऐसे में इसी समस्या से मुक्ति पाने के लिए वारासिवनी विकासखंड के सांवगी गांव की 19 महिलाओं ने मिलकर कमाल ही कर दिया. दरअसल, सभी महिलाएं एक स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई है. ऐसे में सभी महिलाएँ सीजन के हिसाब से अलग-अलग काम कर करती है. अब होली के त्यौहार पर वह न सिर्फ प्राकृतिक रंग बनाकर अपनी आय का नया जरिया बना रही बल्कि दूसरे की सेहत का ध्यान भी रख रही है. जानिए क्या है पूरी कहानी…
साल 2023 में बना था ये स्व सहायता समूह
खेलन बाई का राशि तेजस्विनी स्व सहायता समूह साल 2019 में बना था. इस ग्रुप में 19 महिलाएं है. ऐसे में इन महिलाओं को RSETI की मदद से नेचुरल गुलाल बनाने की ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद सभी महिलाओं ने मिलकर हर साल प्राकृतिक रंग बनाने का फैसला किया और वह इस साल प्राकृतिक रंग बनाकर अच्छी कमाई भी कर रही है.
केमिकल से नहीं खाने की चीजों से बन रहा रंग
राशि तेजस्विनी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने लोकल 18 को बताया कि वह हरा, लाल, बैंगनी, पीला और गुलाबी रंग आसानी से घर पर ही बना लेती है. इसके लिए उन्हें हरा रंग बनाने की लिए पालक, लाल रंग बनाने चुकंदर और पीला रंग बनाने के लिए पलाश के फूल की जरूरत होती है. ऐसे में सभी महिलाएं आसानी से बना लेती है. वहीं, ये सारा काम समूह में मिलकर करती है.
हर्बल गुलाल तैयार करने में सिर्फ दो से तीन दिन का समय लगता है. इसमें पहले पलाश के फूल, चुकंदर और पालक के पत्तों को सुखाया जाता है फिर मिक्सर मशीन में पिसा जाता है. फिर इसमें अरारोट या फिर मक्के आटे में मिलाया जाता है और फिर तैयार हो जाता है आपका हर्बल गुलाल.
इस साल तैयार किया 20 किलो गुलाल
महिलाओं ने इस साल 20 किलो अलग-अलग रंग का गुलाल तैयार किया है. यह हाथों बिक भी जाता है. जानने वाले पहले से ही इसके लिए बूकिंग कर देते हैं. वहीं, अगर ये बच भी जाए, तो इस गणेश विसर्जन में बेच देते हैं. आपको बता दें कि महिलाओं ने 10 रुपए से लेकर 50 रुपए के पैकेट बनाए है.
हर्बल गुलाल सेहत ही नहीं किसी को बनाएगा आर्थिक मजबूत
हर्बल गुलाल के इस्तेमाल न सिर्फ आप और आपके अपने सुरक्षित रहेंगे बल्कि जो आम लोग हर्बल गुलाल बनाते हैं उनकी भी आमदनी होगी. ऐसे में समूह की महिलाओं ने अपील की है कि ज्यादा से इस तरह की हर्बल गुलाल का इस्तेमाल करें ताकि ऐसे रोजगार आगे बढ़ सके. बालाघाट के गांवों से निकलकर फूलों से तैयार हो रहे हर्बल गुलाल शहरों की गलियों तक पहुंच रहे है. ऐसे में लोगों ने इसमें भी दिलचस्पी भी दिखाई है.
बालाघाट की इस लोकेशन पर मिलेगा हर्बल गुलाल
बालाघाट के अम्बेडकर चौक स्थित तुरकर भवन में आजीविका होली मेला लगा हुआ हैं. NRLM की डीपीएम श्वेता महतो ने बताया कि 10 ब्लॉक से 15 स्व सहायता समूहों को आमंत्रित किया गया है. ऐसे में इस मेले का प्रचार भी किया गया है. ताकि उनकी बिक्री हो सके.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें