दतिया में दहेज में मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की हत्या के मामले में अदालत ने पति समेत तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। खास बात यह रही कि सुनवाई के दौरान मायके पक्ष के कई गवाह अपने बयान से मुकर गए, लेकिन फॉरेंसिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने तीनों को हत्या का दोषी माना। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सविता जड़िया की अदालत ने समीर मोगिया, रतीलाल मोगिया और शुगर सिंह मोगिया को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। मामला 19 अगस्त 2024 का है। प्रकाश नगर निवासी उजाला मोगिया को उसके ससुराल वाले जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उस समय ससुराल पक्ष ने मौत का कारण फांसी लगाना बताया था। अस्पताल से सूचना मिलने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि उजाला की शादी प्रकाश नगर निवासी समीर मोगिया से हुई थी। विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज को लेकर उसे परेशान करते थे और मायके जाने से भी रोकते थे। घटना वाले दिन उजाला की मां विद्धू बाई बेटी को लेने ससुराल पहुंची थीं। आरोप है कि, उस समय पति समीर, नाना ससुर रतीलाल और मामा ससुर शुगर सिंह उजाला के साथ मारपीट कर रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने मोटरसाइकिल की मांग दोहराते हुए जान से मारने की धमकी दी। मां के लौटने के कुछ घंटे बाद ही उजाला की मौत की खबर आ गई। मामले में दहेज हत्या और हत्या की धाराओं में केस दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। करीब दो साल तक चली सुनवाई के दौरान मायके पक्ष के गवाह अदालत में पक्षद्रोही हो गए और अपने बयान बदल दिए। इसके बावजूद अदालत ने फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अहम मानते हुए तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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