घर पर तैयार करें शुद्ध न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर चारा, मात्र 20 रुपए लागत

घर पर तैयार करें शुद्ध न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर चारा, मात्र 20 रुपए लागत


होमताजा खबरकृषि

घर पर तैयार करें शुद्ध न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर चारा, मात्र 20 रुपए लागत

Last Updated:

गर्मी में पानी जैसी समस्या तो होती है साथ ही पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होता है. अगर कोई पशुपालक अपने घर पर गर्मी के मौसम में हरा चारा का उत्पादन करना चाहता है तो वह गेहूं मक्का जो जैसे किसी भी फसल के बीज ले सकता है. गर्मी में हरा चारा खिलाने से दुग्ध उत्पादन तो ठीक रहेगा ही साथ ही औषधीय गुणों से भी भरपूर रहेगा.

सागर. सागर और बुंदेलखंड जैसा क्षेत्र गर्मी के मौसम में पानी जैसी समस्या से तो जूझता ही है लेकिन पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होता है. सागर में छोटी बड़ी 25 से ज्यादा गौशालाएं चल रही हैं. चारे की कमी से जूझ रही इन गौशालाओं के लिए गर्मी में एक नई उम्मीद जगी है. जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा हाइड्रोपोनिक्स विधि से चारा उत्पादन शुरू हो गया है. यह विधि गांव में नवरात्र के दौरान बोए जाने वाले जवारों पर आधारित है, इसी से आइडिया लेकर जिले की करीब 12 गोशालाओं में गर्मी के मौसम में चारा उत्पादन किया जा रहा है.

अनूप तिवारी बताते हैं कि अगर कोई पशुपालक अपने घर पर गर्मी के मौसम में हरा चारा का उत्पादन करना चाहता है तो वह गेहूं मक्का जो जैसे किसी भी फसल के बीज ले सकता है, सबसे पहले इसको कम से कम 12 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखना है. फिर उसको या तो जूट के बोरा पर या प्लास्टिक की ट्रे में डाल सकते हैं. यह पानी में ही उगाया जाता है इसमें किसी भी तरह की मिट्टी नहीं होती 8 से 10 दिन में यह 1 फीट तक का अंकुरण हो जाता है जो लगभग 1 किलो से 8 किलो हरा चारा का उत्पादन होता है और यह साइकिल चलता रहता है किसी किसान के पास चार पशु है तो वह चार ट्रेन में इसको लगा दे तो रोजाना लगभग 4 किलो चार मिलता रहेगा जिसमें वह अपने पशुओं को उसे खिला रहे जिससे ना तुम्हारा चार की कमी होगी और ना ही जानवरों को पोषक तत्वों की जिसकी वजह से उन्हें कोई बीमारी नहीं लगेगी साथ ही वह तंदुरुस्त रहेंगे जिससे उनका बछड़ा या बछिया ठीक रहेगी.

शुद्ध न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर चारा
गर्मी में हरा चारा खिलाने से दुग्ध उत्पादन तो ठीक रहेगा ही साथ ही औषधीय गुणों से भी भरपूर रहेगा. और हमें महंगा दाना भी नहीं खिलाना पड़ेगा घर पर ही शुद्ध न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर चारा में मिलता रहेगा.

अनूप तिवारी बताते हैं कि वैसे तो जिले भर में कई सारी गौशालाएं हैं लेकिन कुछ जगहों पर प्रयोग की तौर पर इसकी शुरुआत की गई है जिसमें उनके पास लगभग ढाई सौ पशु है. एक-एक गौशाला पर 80-80 ट्रे में हाइड्रोपोनिक तरीके से चारा उगाया जा रहा है. इसकी वजह से एक तरफ जहां महिलाओं की इनकम बढ़ रही है तो दूसरी तरफ जो कमजोर निराश्रित गोवंश है उनके लिए अच्छा आहार मिल रहा जिसकी वजह से वह गर्मी में हीट वेव से भी बची रहेंगे साथ ही जब यह तंदुरुस्त होगी तो ग्याभिन होगी, फिर इनसे दुग्ध उत्पादन होगा जिसकी वजह से गौशालाओं की आय बढ़ेगी.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें



Source link