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Sankashti Chaturthi: एकदंत संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित विशेष दिन है, जो 5 मई को मनाई जाएगी. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए उपाय जीवन के कष्टों को दूर करते हैं. गणपति की पूजा, व्रत और सच्चे मन से प्रार्थना करने से सुख-समृद्धि आती है और हर बाधा से मुक्ति मिलती है.
हिन्दू धर्म में हर तिथि और हर वार का अपना धार्मिक महत्व है. पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित है. इस दिन लोग घर की खुशहाली और उन्नति के लिए व्रत-उपासना करते हैं.
इस चतुर्थी पर गणपति पूजन से जीवन के सारे कष्टों का निवारण हो जाता है. घर में सुख-संपन्नता बनी रहती है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार इस बार ज्येष्ठ माह की यह चतुर्थी खास होने वाली है क्योंकि इस चतुर्थी पर शुभ योग का निर्माण हो रहा है. आइए जानते है इस दिन प्रथम पूज्य भगवान कैसे प्रसन्न होंगे.
कब मनाई जायगी संकष्टी चतुर्थी
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि शुरुआत 5 मई 2026 को सुबह 6 बजकर 24 मिनिट के लगभग से शुरू होंगी. वही चतुर्थी तिथि समापन 6 मई 2026 को सुबह 7 बजकर 51 मिनिट के लगभग होगा. ऐसे मे चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 31 मिनट पर रहेगा. इसलिए 5 मई को ही यह चतुर्थी बनाई जायगी. वही इस दिन संकष्टी चतुर्थी पर शिव योग पूरे दिन बन रहा है. साथ ही अभिजीत मुहूर्त सुबह में 11 बजकर 51 मिनिट से 12 बजकर 45 दोपहर तक रहेगा. इस बीच में गणेश जी की पूजा- अर्चना कर सकते हैं.
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश को विघ्नों का नाश करने वाले और बुद्धि-विवेक के प्रदाता के रूप में विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है. विनायक चतुर्थी का दिन उनकी उपासना के लिए अत्यंत शुभ होता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मन की इच्छाएं पूर्ण होने लगती हैं. श्रद्धा और विश्वास के साथ रखा गया व्रत सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है. मान्यता है कि सच्चे भाव से गणपति की आराधना करने पर नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
कैसे करें भगवान को प्रसन्न
विनायक चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान गणेश की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. इस दिन श्रद्धा से 21 दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है, जिससे गणपति बप्पा की कृपा सदैव बनी रहती है. पूजा के दौरान “श्री गणेशाय नमः” मंत्र का जप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. भगवान गणेश को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाना भी बहुत प्रिय होता है. साथ ही मंदिर जाकर सिंदूर, लाल पुष्प, नारियल, सुपारी, कलावा और जनेऊ अर्पित करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है.