जबलपुर. मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी डैम की शांत लहरें उस वक्त काल बन गईं, जब खुशियां मना रहे सैलानियों से भरा क्रूज जल समाधि ले गया. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 11 जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं, 28 को बचा लिया गया है, लेकिन 2 लोग अब भी गहरे पानी में लापता हैं. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आगरा से आई भारतीय सेना की स्पेशल गोताखोर टीम लहरों को चीरकर अपनों की तलाश कर रही है.
लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उस ‘ब्लैक थर्सडे’ की शाम को पानी के बीच हुआ क्या था? क्या यह महज एक ‘कुदरत का कहर’ था या फिर लापरवाही की कोई बड़ी कहानी? लोकल 18 की टीम ने उस शख्स से बात की, जो हादसे के वक्त क्रूज के स्टियरिंग पर था-पायलट महेश पटेल.
20 साल का अनुभव, ‘कुदरत’ के आगे बेबस
8वीं पास पायलट और 50 मीटर की वो ‘मौत’ वाली दूरीबरगी के घुल्लापाट गांव का रहने वाला 45 वर्षीय महेश पटेल, जो कभी गांव में चक्कू और छोटी नावें चलाता था, आज जबलपुर के सबसे बड़े क्रूज का पायलट है. महेश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बरगी नगर में ही 8वीं तक की, लेकिन पानी के साथ उसका रिश्ता पुराना था. 2012 में गोवा से लाइसेंस मिलने के बाद वह पेशेवर पायलट बना.
महेश ने बताया कि 30 अप्रैल की शाम 5 बजकर 16 मिनट पर सब कुछ सामान्य था. क्रूज अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा था. लेकिन पौने छह बजे के करीब अचानक मौसम और किस्मत दोनों बदल गए. महेश के ने बताया हम किनारे से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर थे. मैं बोट को सुरक्षित कोने में खड़ा करने ही वाला था कि अचानक एक जोरदार झटका लगा और बोट डगमगाने लगी। देखते ही देखते पानी अंदर भरने लगा.
अपनी साख पर उठ रहे सवालों पर महेश भावुक हो जाते हैं. उन्होंने अपने 20 साल के करियर में ऐसा खौफनाक मंजर नहीं देखा. ‘लोग कह रहे हैं कि मेरी गलती है, लेकिन मैंने अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों को बचाने की कोशिश की. यह कुदरत का कहर था, जिसके सामने इंसान छोटा पड़ गया काश 2 मिनट और मिल जाते’
लाइफ जैकेट, सुरक्षा या महज औपचारिकता?
हादसे के बाद वायरल हो रहे वीडियो में कई लोग बिना लाइफ जैकेट के नजर आ रहे हैं. इस पर सफाई देते हुए उन्होंने बताया कि जैकेट तो पर्याप्त थीं, लेकिन सैलानियों की लापरवाही भारी पड़ गई. क्रूज पर मौजूद कुछ बच्चे और युवा म्यूजिक की धुन पर डांस कर रहे थे. मस्ती के आलम में उन्होंने लाइफ जैकेट उतार दी थी या पहनी ही नहीं थी. उन्होंने दावा किया ‘हम हर गेस्ट को जैकेट पहनने को कहते हैं, लेकिन लोग एंजॉय करने के चक्कर में उसे बोझ समझने लगते हैं.’ वायरल वीडियो में जैकेट पैक दिखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दिनभर के इस्तेमाल के बाद उन्हें सुरक्षित रखने के लिए पैक किया जाता है, लेकिन हादसे के वक्त वे उपलब्ध थीं.
वो 60 सेकंड… और सब खत्म
महेश पटेल ने बताया कि जब पहली लहर ने बोट को हिट किया, तो वह ऊपर पायलट केबिन में थे. नीचे क्या चीख-पुकार मची थी, वह देख नहीं पा रहे थे. उन्होंने तुरंत फोन पर बैकअप बोट भेजने की सूचना दी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. ‘एक सेकंड के भीतर बोट पलट गई. मुझे संभलने का मौका तक नहीं मिला. मैंने अपनी आंखों के सामने दो-तीन बच्चों को जाली से निकालकर ऊपर सुरक्षित फेंकने की कोशिश की, तभी एक भवर की तरह लहर आई और मुझे भी बहा ले गई.’ महेश खुद लाइफ जैकेट के सहारे तैरते हुए किनारे तक पहुंचे, पत्थरों से टकराने की वजह से चोटें भी आई.
इंजन में खराबी,’चेतावनी’ को नजरअंदाज?
हादसे की तकनीकी वजहों को लेकर उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने स्वीकार किया कि क्रूज के दो इंजनों में से एक इंजन कुछ समय से समस्या कर रहा था और उसकी स्पीड कम थी. उन्होंने इस तकनीकी खराबी के बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को तीन महीने पहले ही सूचित कर दिया था. हालांकि, उनका कहना है कि एक इंजन पर भी बोट चलाई जा सकती है, लेकिन क्या उस ‘कमजोर’ इंजन ने संकट के समय बोट को कंट्रोल करने की क्षमता खो दी थी? यह जांच का अब बड़ा विषय बन गया है.