नई कार खरीदने का सपना हर किसी का होता है. शोरूम में चमकती गाड़ियां, ब्रोशर पर छपा आकर्षक माइलेज फीगर और सेल्समैन का आश्वासन- ‘सर, 25 kmpl आराम से देगी’. गाड़ी खरीदने के कुछ महीने बाद रियलिटी चेक होता है. शहर की ट्रैफिक में, एसी चालू करके, सामान्य ड्राइविंग स्टाइल में माइलेज 15-18 kmpl तक गिर जाता है. कई बार तो 30% तक कम मिलता है.
ये कोई इंसानी गलती नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक गैप है जो ARAI टेस्टिंग और रियल वर्ल्ड कंडीशन्स के बीच है. विज्ञापनों में बड़े-बड़े दावे करके कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करती हैं, लेकिन असल में कस्टमर महंगी पेट्रोल की मार झेलता है. ये धोखा इतना आम है कि कार खरीदने वाले हर व्यक्ति को इससे पहले इसके बारे में जानना चाहिए.
क्लेम्ड माइलेज में ये दिक्कत
ARAI टेस्टिंग लैब में होती है, जहां परफेक्ट कंडीशन बनाई जाती है. कार को डायनामोमीटर (रोलर) पर चलाया जाता है, एयर कंडीशनिंग बंद रखी जाती है, ड्राइविंग स्टाइल कंप्यूटर सिमुलेटेड और बहुत स्मूद होती है. दूरी सीमित होती है और ट्रैफिक, गड्ढे, लोड या फास्ट एक्सेलरेशन जैसी रियल लाइफ समस्याएं नहीं होती हैं. नतीजा: ARAI फिगर अक्सर 20-35% ज्यादा दिखता है. उदाहरण के लिए, अगर कंपनी 22-25 kmpl का क्लेम करती है तो शहर में 15-18 kmpl ही मिलना सामान्य है.
खुद चलाने पर कम क्यों?
रियल वर्ल्ड में कई फैक्टर्स माइलेज को प्रभावित करते हैं. सबसे बड़ा विलेन तो AC ही है. भारतीय गर्मी में बिना एसी चलाना मुश्किल है, लेकिन टेस्ट में इसे ऑफ रखा जाता है. ट्रैफिक जाम में आइडलिंग, खराब सड़कें, ओवरलोडिंग, फ्यूल की मिलावट, आक्रामक ड्राइविंग और हाई स्पीड हाईवे पर भी अंतर आता है. छोटी पेट्रोल हैचबैक में ये गैप ज्यादा दिखता है, जबकि डीजल या बड़े इंजन वाली गाड़ियों में थोड़ा कम. कई यूजर्स रिपोर्ट करते हैं कि हाईवे पर ARAI के करीब माइलेज मिल जाता है, लेकिन शहर में भारी गिरावट होती है.
कंपनियां गलत बोलती हैं?
ये समस्या नई नहीं है. सालों से कार खरीदार शिकायत करते आ रहे हैं. कंपनियां इसे मार्केटिंग टूल की तरह इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि भारत में माइलेज सबसे बड़ा फैक्टर है. ब्रोशर में छोटे-छोटे asterisk (*) के साथ लिखा होता है ‘ARAI certified, ideal conditions’, लेकिन आम आदमी इसे नजरअंदाज कर देता है. नतीजा, खरीद के बाद निराशा हाथ लगती है. अगर हम ARAI फिगर को 25-30% कम करके देखें तो रियलिस्टिक अनुमान लगाया जा सकता है.
नई कार खरीदने से पहले क्या करें?
- ARAI फिगर को भरोसा न मानें, बल्कि रियल यूजर रिव्यूज देखें या पढ़ें.
- अपने शहर की ट्रैफिक, ड्राइविंग स्टाइल और इस्तेमाल के हिसाब से कैलकुलेट करें.
- टेस्ट ड्राइव पर खुद चेक करें. एसी ऑन करके, नॉर्मल स्पीड में कितना दे रही है.
- टायर प्रेशर सही रखें, नियमित सर्विसिंग करवाएं.
- अनावश्यक वजन न रखें और स्मूद ड्राइविंग अपनाएं.
- CNG या हाइब्रिड ऑप्शन पर भी विचार करें.
कार कंपनियां कंपटीशन के चलते बड़े क्लेम करती हैं, लेकिन अंतिम फैसला ग्राहक का होता है. माइलेज के नाम पर धोखा खाने से बचें. सही जानकारी और रियल एक्सपेक्टेशन के साथ खरीदारी करें तो पछतावा नहीं होगा. याद रखें, 25 का क्लेम सिर्फ कागज पर अच्छा लगता है. सड़क पर जो मिले, वही असली माइलेज है.