संस्कृति महासंगम: प्राचीन संस्कृति के पहलुओं को जानने से होगा अपनी संस्कृति पर गौरव

संस्कृति महासंगम: प्राचीन संस्कृति के पहलुओं को जानने से होगा अपनी संस्कृति पर गौरव


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कुरुक्षेत्र10 मिनट पहले

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ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल वक्ता।

  • विद्या भारती द्वारा ‘संस्कृति महासंगम’ कार्यक्रम आयोजित

विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान द्वारा कार्तिक पूर्णिमा पर ‘संस्कृति महासंगम’ कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किया गया। अध्यक्षता विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी ने की। उद्बोधन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय मंत्री एवं संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर का रहा।

कार्यक्रम में देशभर के करीब 550 संस्कृति प्रेमियों ने हिस्सा लिया। संचालन संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने की। संस्कृति बोध परियोजना के राष्ट्रीय संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने अतिथि परिचय कराया। इस अवसर पर ऑनलाइन संस्कृति ज्ञान परीक्षा में पंजीकरण कैसे किया जाए, इसे देशभर के प्रतिभागियों को पी.पी.टी. के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विद्या भारती उत्तर क्षेत्र से अनिल कुलश्रेष्ठ, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र से यशपाल सिंह, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र से राजकुमार, उत्तर पूर्व क्षेत्र से अजय कुमार तिवारी पूर्वोत्तर क्षेत्र से मनमोहन कलिता, पूर्व क्षेत्र से कैलाश चन्द्र मिश्र, दक्षिण मध्य क्षेत्र से अशोक पाटिल, पश्चिम क्षेत्र से शेषाद्री व्यंकटेश डांगे, राजस्थान क्षेत्र से रमेश शुक्ला, मध्य क्षेत्र से अंबिकादत्त कुंडल शामिल रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर ने कहा कि भारत की संस्कृति महान व प्राचीनतम संस्कृति है। इसका गौरव अगली पीढ़ी को होना चाहिए।



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