मंत्री का दावा: धार्मिक नगरी के साथ साइंस टूरिज्म के रूप में उज्जैन की होगी पहचान- मंत्री

मंत्री का दावा: धार्मिक नगरी के साथ साइंस टूरिज्म के रूप में उज्जैन की होगी पहचान- मंत्री


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उज्जैन16 मिनट पहले

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पत्रकारों से बात करते उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव

  • डाेंगला में वराह मिहिर वेधशाला का निर्माण कार्य अंतिम स्तर पर

मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन को साइंस टूरिज्म के रूप में पहचान दिलाने के लिए डोंगला में वाराह मिहिर वेधशाला का निर्माण कराया जा रहा है। उज्जैन में पर्यटक अब तक महाकालेश्वर मंदिर दर्शन और शिप्रा स्नान के लिए ही आते थे। आदिकाल से ही खगोलीय दृष्टि से उज्जैन का विश्व में अपना महत्व रहा है। 300 साल पहले विश्व में शुद्ध समय की गणना उज्जैन से होती थी लेकिन आज लंदन के ग्रीनविच रेखा से होती है। उज्जैन के इस महत्व को पुनर्स्थापति करने के लिए डोंगला में एक नए वेधशाला की स्थापना की जा रही है। यह वेधशाला 80 हजार 400 वर्ग फीट में फैला है। 5 मीटर डोम पर स्थापित इस वेधशाला में 0.5 मीटर का रोबोटिक टेलिस्कोप और लार्जफार्मेट सीसीडी कैमरा लगाया गया है। खगोल वैज्ञानिक अक्टूबर से मार्च तक सौरमंडल में होने वाली खगोलीय घटनाओं पर नजर रखेंगे।

खगोल वैज्ञानिकों के लिए उज्जैन बनेगा शोधशाला

उन्होंने बताया कि उज्जैन की आने वाले समय में साइंस सिटी के रूप में पहचान होगी। उज्जैन में आठ साल पहले प्लैनेटोरियम की स्थापना की गई थी। उसी स्थान पर साइंस का सब सेंटर और 3D स्टूडियो के निर्माण की फैसला सरकार ने लिया है। जिससे खगोल विज्ञान के शोधार्थियों को उज्जैन से जोड़ा जा सकेगा। इसके लिए 24 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल गई है।



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