पूर्व वित्त मंत्री राघवजी ने कहा: बजट से ज्यादा कर्ज आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं

पूर्व वित्त मंत्री राघवजी ने कहा: बजट से ज्यादा कर्ज आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं


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भोपाल40 मिनट पहले

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पूर्व वित्त मंत्री राघवजी

राज्य बजट 2.41 लाख करोड़ रुपए का है, लेकिन सरकार पर कर्ज इससे ज्यादा 2.50 लाख करोड़ का है। ज्यादा कर्ज होने के मायने यह हैं कि सरकार हर साल ज्यादा ब्याज चुका रही है। यह प्रदेश की वित्तीय सेहत के लिए अच्छा नहीं है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर वैट नहीं घटाया। रजिस्ट्री भी सस्ती नहीं की। आम जनता को राहत की उम्मीद थी। हमारे प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स है। रजिस्ट्री भी देश में सबसे महंगी है।

सरकारों की मजबूरी यह है कि जीएसटी के आने के बाद उनका हाथ तंग हो गया है। इसलिए मैंने मप्र सरकार में वित्त मंत्री रहते छह साल तक जीएसटी नहीं लगने दिया। पूरे देश में इसके खिलाफ लड़ाई की अगुवाई की। हालात यह है कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, सबकी कमाई का जरिया अभी भी गैर जीएसटी वाले पेट्रोल और शराब जैसे उत्पाद हैं। अगर सरकार ने इस पर टैक्स घटाया तो वह संकट में फंस जाएगी। लेकिन, ज्यादा टैक्स होने के कारण प्रदेश में डीजल की बिक्री कम हो रही है।

लोग दूसरे राज्यों से ईंधन लेकर मप्र में आ रहे हैं। राज्य बजट में अच्छी बात यह है कि सरकार ने 24 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। करीब ढाई हजार नई गोशालाएं खोली जाएंगी। 9 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाने हैं। लेकिन, राज्य सरकार को यह देखना चाहिए कि मप्र के हर विभाग में हजारों पद खाली हैं। केवल पुलिस महकमें में हजारों आरक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन पर भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाई जाने की जरूरत थी। लेकिन, सरकार ने इसके लिए कोई बात ही नहीं की।

सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का योगदान बढ़ाकर 25% करने की बात कही है। लेकिन यह कैसे होगा? राज्य सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम और ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के लिए 30 दिन में सारे एप्रूवल लाने की घोषणा की है। लेकिन जब तक प्रदेश के डिलीवरी सिस्टम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का रवैया नहीं बदलता, तब तक हालात में सुधार नहीं होगा। मैंने वित्त मंत्री रहते कई ग्लोबल इंवेस्टर समिट का आयोजन किया। बड़े उद्यमी आए। कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर भी उतरे। लेकिन, निवेश का जो ताना बाना बुना गया था, वो साकार नहीं हो पाया। इस स्थिति में तेजी से बदलाव की जरूरत है। सरकार को पर्यटन में बड़ी संभावनाएं तलाशनी होंगी। यह सेक्टर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की रीढ़ बन सकता है, क्योंकि प्रदेश पर्यटन की संभावनाओं से भरा पड़ा है।

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