इंदौर में ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से चार राज्यों मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के हाई कोर्ट के न्यायाधीशों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा, मप्र हाई कोर्ट और मप्र राज्य न्याय
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सम्मेलन की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जितेंद्रकुमार माहेश्वरी ने दीप जलाकर की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की भूमिका केवल कानून की व्याख्या करना ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना भी होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों में मामलों की बढ़ती संख्या और समाज के वंचित वर्गों तक न्याय नहीं पहुंच पाना एक बड़ी चुनौती है।
सम्मेलन का विषय था “अदालतों में बढ़ते मामले और न्याय से वंचित वर्ग (पश्चिम क्षेत्र)।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ।
इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज सतीशचंद्र शर्मा ने न्यायाधीशों से कहा कि वे निडर होकर और निष्पक्ष रूप से फैसला लें। मप्र हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है।
सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक अनिरुद्ध बोस ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में हाई कोर्ट इंदौर के न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस सम्मेलन में मप्र हाई कोर्ट के जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर के न्यायाधीशों के अलावा मुंबई, राजस्थान और गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश और चारों राज्यों से आए कई न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।
इस अवसर पर मप्र हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्मिंदर सिंह, राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक कृष्णमूर्ति मिश्रा, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के रजिस्ट्रार विजय चंद्रा और इंदौर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।