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Ujjain Ajab Gajab News: उज्जैन के अशोक दुबे पिछले 7 सालों से रोजाना हजारों कौवों को दाना खिला रहे हैं. पितृ पक्ष में दूर-दूर से लोग उनके पास आकर कौवों को भोजन कराते हैं. जानिए क्यों कौवों को खिलाना धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
7 साल से निभा रहे हैं दोस्ती
अशोक कुमार दुबे जिनकी उम्र 68 वर्ष है उन्होनें लोकेल 18 को बताया कि, कौवों से दोस्ती का नाता कोई नई बात नहीं, बल्कि करीब 6-7 बरस पुरानी बात हैं. कृष्ण विहार कॉलोनी में एक बरगद के नीचे रोज सुबह- शाम कौवें जमा हो जाते है और वह इनके लिए दाना पानी डालते हैं. खास बात यह है कि इनको देख कौवा जोर-जोर से चिल्लाते और सिर पर मंडराने लगते हैं. अशोक ने बताया कि मैं इसे केवल पक्षी प्रेम की दृष्टिकोण से देखता हूँ. सात सालों से यह सिलसिला चल रहा है. रोजाना करीब हज़ार से 1500 कौआ यहा आ रहे है.
15 किलोमीटर दूर से आ रहे हैं भोजन कराने
इंदिरा नगर निवासी दिलीप नें बताया कि वह करीब 3-4 साल से यहा कौआ के भोजन कराने आ रहे है. उन्होंने बताया रोजाना तो आना नही पाता है. लेकिन पितृ पक्ष मे विशेष रूप से समय निकालकर यहा आता हूँ. आज के समय मे यह प्रजाति दुर्लभ हो गई है. उज्जैन मे यह एक मात्र जगह जहा इतने कौआ एक साथ देखने को मिलते है. वह भी अशोक दुबे जी कि वजह से क्युकि उन्होंने ही मुझे यहा आने का मौका दिया.
अशोक कुमार दुबे नें बताया कि ऐसे तो कौआ को कोई स्पेशल भोजन नही है. लेकिन हम हमेशा चावल डालते है. करीब महीने के तीन कुंटल चावल कौआ के लिए हर महीने लाता हूँ. साथ ही यह कौआ को फीकी नुगति, दाल, तोस यह सब यह और अच्छे से खाते है. इसलिए समय समय पर मे यह सब भी डालता हूँ.
क्या है कौआ को भोज कराने का धार्मिक महत्व
उज्जैन के ज्योतिषआचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार कौवा यम के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. पितृ पक्ष के दौरान कौवे का होना पितरों के आस पास होने का संकेत माना जाता है. कहते हैं श्राद्ध के दौरान इसको ग्रास न दें, तो पूर्वज भूखे लौट जाते हैं. इसलिए सभी लोग पितृ पक्ष मे कौआ को भोजन कराने के लिए ढूंढते हैं.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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