सीधी जिले के आदिवासी अंचल कुसमी में कृषि विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। किसानों को वितरित की जाने वाली रासायनिक दवाएं उन तक नहीं पहुंचीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों ने उन्हें खुले में आग के हवाले कर दिया।
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कार्यालय के पास मिली जली और अधजली दवाएं
यह मामला तब उजागर हुआ जब मीडिया की टीम कृषि विस्तार कार्यालय कुसमी पहुंची। कार्यालय के पास कई जली और अधजली दवाओं की बोतलें मिलीं। कुछ बोतलों में अब भी रासायनिक पदार्थ मौजूद थे, जिससे आसपास प्रदूषण और स्वास्थ्य खतरे की आशंका बढ़ गई।
आरआईओ बोलीं-‘दवाइयां खराब हो गई थीं
जब संबंधित आरईओ से संपर्क करने का कोशिश किया गया, तो वे अनुपस्थित पाए गए। मौके पर मौजूद नई आरआईओ हिमांशी सिंह ने बताया कि ‘दवाइयां खराब हो गई थीं, इसलिए उन्हें फेंक दिया गया।’ हालांकि, जांच में पता चला कि ये वही दवाएं थीं जो किसानों को वितरण के लिए आई थीं, लेकिन उन्हें बांटा नहीं गया था।
गड्ढा खोदकर मिट्टी में डिस्पोज की दवाएं
नियमों के अनुसार, खराब रासायनिक दवाओं को गड्ढा खोदकर मिट्टी में सुरक्षित रूप से डिस्पोज किया जाना चाहिए। कृषि विभाग ने न तो इस प्रक्रिया का पालन किया और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बजाय, बचे हुए स्टॉक को खुले में फेंककर और जलाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
इस लापरवाही से न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हुई है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर आरईओ एस.पी. साकेत से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही कोई जानकारी देना उचित समझा।


