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Khandwa News: अंकुश पवार लोकल 18 को बताते हैं कि सरकार की सब्सिडी स्कीम ने हमें बहुत मदद की. हमने खुद ट्रेनिंग ली और अब दूसरों को भी यह सिखा रहे हैं. हमारे गांव के कई किसान अब खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन कर रहे हैं.
खंडवा. मध्य प्रदेश में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसे व्यवसाय की ओर बढ़ रहे हैं, जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा दे सके. ऐसा ही एक लोकप्रिय और तेजी से बढ़ता हुआ व्यवसाय है मधुमक्खी पालन (Bee Keeping Business). यह न सिर्फ किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रहा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और परागण के माध्यम से कृषि उत्पादन भी बढ़ा रहा है. मधुमक्खी पालन ऐसा व्यवसाय है, जिसे बहुत कम जगह और लागत में शुरू किया जा सकता है. खेत के किनारे, बगीचे के पास या खुले स्थान पर मधुमक्खियों के बक्से रखे जा सकते हैं. इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की भी व्यवस्था सरकार और निजी संस्थानों द्वारा की जाती है. शुरुआत में किसान 4 से 5 बक्सों से काम शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे इसे बढ़ा सकते हैं. एक मधुमक्खी बक्सा लगभग 4000 रुपये में उपलब्ध होता है, जिस पर सरकार 50 फीसदी तक की सब्सिडी देती है, यानी किसान को सिर्फ 2000 रुपये खर्च करने होते हैं.
तीन महीनों में तैयार होता है शुद्ध शहद
मधुमक्खियां फूलों से पराग और रस इकट्ठा करके शहद तैयार करती हैं. एक बॉक्स से तीन महीने में 8 से 10 किलो तक शहद निकाला जा सकता है. शुद्ध देशी शहद की बाजार में कीमत 400 से 600 रुपये प्रति किलो तक होती है. इस हिसाब से एक बॉक्स से तीन महीनों में लगभग 4000 से 6000 रुपये तक की कमाई संभव है. यदि किसान 20 बॉक्स लगाता है, तो हर तीन माह में 80 हजार रुपये से 1.2 लाख रुपये तक की आय हासिल कर सकता है. यही वजह है कि कई युवा और किसान अब इस व्यवसाय को अपना रहे हैं.
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के आदिवासी क्षेत्र के दो किसान अंकुश पवार और दर्शन मालवीया ने इस व्यवसाय से अपनी जिंदगी बदल डाली. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ कुछ बक्सों से काम शुरू किया लेकिन आज वे दर्जनों बक्सों से हर महीने हजारों रुपये कमा रहे हैं. उन्होंने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि आसपास के किसानों को भी मधुमक्खी पालन के प्रति प्रेरित किया. अंकुश पवार बताते हैं कि सरकार की सब्सिडी योजना ने हमें बहुत मदद की. हमने खुद प्रशिक्षण लिया और अब दूसरों को भी यह सिखा रहे हैं. हमारे गांव के कई किसान अब खेती के साथ मधुमक्खी पालन कर रहे हैं.
सरकार की पहल और किसानों का भविष्य
मध्य प्रदेश सरकार किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इसके लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं, जहां विशेषज्ञ शहद उत्पादन, मधुमक्खियों की देखभाल और मार्केटिंग के गुर सिखाते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसान खेती के साथ वैकल्पिक आय के साधन अपनाएं. मधुमक्खी पालन से मिलने वाला शहद न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी बड़ी मांग रखता है. ऑर्गेनिक और नैचुरल प्रोडक्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण शहद का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. किसान इसे स्थानीय बाजार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे- एमेजॉन या फ्लिपकार्ट पर भी बेच सकते हैं.
फसलों के परागण में मदद करतीं मधुमक्खियां
शहद के अलावा मधुमक्खी पालन से बी वैक्स (मोम), रॉयल जेली, बी पोलन और प्रोपोलिस जैसे अन्य उत्पाद भी तैयार होते हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग रहती है. यह सभी उत्पाद कॉस्मेटिक, औषधीय और फूड इंडस्ट्री में उपयोग किए जाते हैं. साथ ही मधुमक्खियां फसलों के परागण में मदद करती हैं, जिससे खेती की पैदावार 20-30 फीसदी तक बढ़ जाती है, यानी यह व्यवसाय दोहरा लाभ देता है, शहद की बिक्री से आमदनी और खेती से बढ़ी हुई उपज.
मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जो कम लागत, कम मेहनत और कम समय में ज्यादा मुनाफा देता है. तीन महीने में तैयार होने वाला शहद किसान की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है. सरकार की मदद, प्रशिक्षण और बाजार में बढ़ती मांग इसे एक सुनहरा बिजनेस आइडिया बनाती है. खंडवा के किसानों की तरह अगर आप भी अपनी जमीन का सही उपयोग करना चाहते हैं, तो मधुमक्खी पालन आपके लिए लखपति बनने का सुनहरा मौका साबित हो सकता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.