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Jabalpur news: मध्यप्रदेश की एक प्रमुख और अति पिछड़ी, मूल आदिवासी जनजाति बैगा जनजाति. जिन्हें जंगल का राजा, वनवासी और धरतीपुत्र भी कहा जाता है. खास बात यह है भारत में इनकी आबादी लगभग साढे 5 लाख है. जिसमें से करीब चार लाख आबादी सिर्फ मध्यप्रदेश में निवास करती है. अपने रहन-सहन, खानपान और पहनावे के कारण यह जनजाति बाकी जनजातियों से अलग होती है.
जबलपुर: मध्यप्रदेश की एक प्रमुख और अति पिछड़ी, मूल आदिवासी बैगा जनजाति. जिन्हें जंगल का राजा, वनवासी और धरतीपुत्र भी कहा जाता है. खास बात यह है भारत में इनकी आबादी लगभग साढे 5 लाख है. जिसमें से करीब चार लाख आबादी सिर्फ मध्यप्रदेश में निवास करती है. अपने रहन-सहन, खानपान और पहनावे के कारण यह जनजाति बाकी जनजातियों से अलग होती है. बैगा जनजाति के लोग मध्यप्रदेश के अमरकंटक, मंडला, डिंडोरी, बालाघाट और उमरिया क्षेत्र में निवास करते हैं.
बैगा जनजाति होती है वैद्य
दयाराम रूठरिया ने लोकल 18 से बताया बैगा जनजाति के लोगों को वैद्य भी कहा जाता है. किवंदंतियों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की. तब दो व्यक्ति उत्पन्न किए, एक को ब्रह्मा जी ने नागर मतलब हल पकड़वाया, यह नागर लेकर खेती करने लगा, जो गोंड कहलाया. जबकि दूसरे को उन्होंने टांगिया मतलब कुल्हाड़ी दी, यह कुल्हाड़ी लेकर जंगल काटने चला गया क्योंकि उसे समय वस्त्र नहीं थे, जिसके चलते नंगा बैगा कहलाया. जिसके वंशज बैगा कहलाए. उन्होंने बताया बैगा जनजाति के लोग जमीन नहीं जोतते हैं क्योंकि जमीन को अपना देवता मानते हैं.
ऐसा माना जाता है कि अपनी मां की छाती को खरोचना पाप होगा और वह अपनी मां से एक ही जमीन के टुकड़े से बार-बार भोजन पैदा करने के लिए कभी नहीं कह सकते. जिससे वह कमजोर हो जाती है, लिहाजा बैगा जनजाति के लोग झूम खेती करते हैं. बैगा जनजाति का पहनावा भी अलग होता है, जहां महिलाएं बैगा फरिया मतलब मूंगी पहनती है.
कोदो बाजारा और कुटकी जैसे खाते हैं मोटे अनाज
बैगा जनजाति के लोग मुख्य रूप से कोदो बाजार और कुटकी जैसे मोटे अनाज खाते हैं. बैगा जनजाति के लोगों का एक मुख्य भोजन मक्का को पीसकर या फिर चावल उबालने के बाद बच्चे पानी से बनाए जाने वाला पेय भी होता है. जिसे बैगा जनजाति के लोग पीते हैं. इसके अलावा मछली और छोटे स्तनधारी का शिकार भी बैगा जनजाति के लोग करते हैं. बैगा जनजाति की महिलाएं टैटू बनाने या फिर गोदने की कला के लिए भी जानी जाती हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें