ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार के लिए तैयार की गई 51 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा को लेकर चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। भुगतान संबंधी विवाद के कारण महीनों से अटकी यह प्रतिमा अब रायपुर के लिए रवाना की जा रही है। लगभग आठ महीने पहले ग्वालियर मिंट स्टोन से बनी यह प्रतिमा छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित चंद्रखुरी में रामपथ गमन स्थल पर स्थापित की जानी थी। प्रतिमा तैयार होने के बाद ठेकेदार और संबंधित पक्षों के बीच भुगतान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके कारण प्रतिमा लेने से इनकार कर दिया गया था। इस मामले ने तब सुर्खियां बटोरीं, जब छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री ग्वालियर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए और मीडिया ने उनसे इस मुद्दे पर सवाल किया। मंत्री ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था। लंबी बातचीत के बाद आखिरकार मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा को प्रतिमा की राशि का भुगतान कर दिया गया है। दीपक विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने भगवान रामचंद्र के वनवासी स्वरूप में यह प्रतिमा तैयार की है। 8 बड़े टुकड़ों में बनी इस मूर्ति का वजन लगभग 35 से 40 टन है। इसे बनाने में 20 कारीगरों की टीम ने दिन-रात काम किया और करीब 72 लाख रुपए की लागत आई। प्रतिमा को वाहनों में लोड करने का काम शुरू हो गया है और इसे रात में रवाना कर दिया जाएगा। यह विभिन्न मार्गों से होते हुए दो दिन में अपने गंतव्य रायपुर पहुंच जाएगी। रायपुर पहुंचने के बाद वहां पुरानी प्रतिमा हटाकर इस नई प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा। पहले यह चर्चा भी थी कि प्रतिमा को रायपुर की जगह शनिश्चरा धाम में लगाया जाएगा, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि रायपुर के लिए बनी यह 51 फीट ऊंची प्रतिमा वहीं स्थापित होगी।
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