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कूनो नेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी आई है. मादा चीता ज्वाला ने 9 मार्च 2026 को 5 शावकों को जन्म दिया. इससे भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है. ज्वाला नामीबिया से लाई गई थी और प्रोजेक्ट चीता में शामिल थी. उसने पहले मार्च 2023 में 4 और जनवरी 2024 में 3 शावकों को जन्म दिया था. अब तीसरी बार 5 शावकों के साथ ज्वाला सबसे सफल मादा चीता बन गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे वन्यजीव संरक्षण की बड़ी उपलब्धि बताया. सभी शावक स्वस्थ हैं और निगरानी में हैं. यह प्राकृतिक प्रजनन कूनो के अनुकूल वातावरण का प्रमाण है.
कूनो नेशनल पार्क में ज्वाला चीता ने 5 शावकों को जन्म दिया है.
श्योपुर. कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की दुनिया के लिए बड़ी खुशखबरी आई है, जहां नामीबियाई मादा चीता ज्वाला ने 9 मार्च 2026 को 5 शावकों को जन्म दिया है. इससे भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है, जिसमें 33 भारतीय जन्मे शावक शामिल हैं. ज्वाला के इस सफल प्रजनन ने प्रोजेक्ट चीता को नई ऊंचाई दी है और चीतों की आबादी 50 के पार पहुंच गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है. ज्वाला सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री द्वारा छोड़े गए 8 नामीबियाई चीतों में शामिल थी, जिसका मूल नाम सियाया था लेकिन कूनो में ज्वाला नाम रखा गया. यह तीसरी बार है जब ज्वाला मां बनी है. पहले मार्च 2023 में 4 शावकों में से एक जीवित बचा, जनवरी 2024 में 3 शावक पैदा हुए. अब प्राकृतिक मेटिंग से 5 शावकों का जन्म कूनो के वातावरण में चीतों की सफल अनुकूलन का प्रमाण है. वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और सभी शावक स्वस्थ हैं. चीतों का पुनर्स्थापन 1952 में विलुप्त होने के बाद अब फल-फूल रहा है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि प्रोजेक्ट चीता के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है क्योंकि नामीबियाई चीता ज्वाला, जो तीसरी बार मां बनी है, ने आज कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच शावकों को जन्म दिया. सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस जन्म के साथ, भारत में जन्मे स्वस्थ शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जो भारतीय धरती पर चीतों के 10वें सफल प्रजनन का प्रतीक है- भारत के चीता संरक्षण अभियान में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है.
भारतीय जन्मे चीतों की संख्या 33 पर पहुंची
यह घटना भारत में चीतों की वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि 5 शावकों का जन्म एक साथ होने से आबादी तेजी से बढ़ी है और भारतीय जन्मे चीतों की संख्या 33 पहुंच गई है. पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे गर्व का क्षण बताया है. ज्वाला की सफलता से कूनो में प्रजनन दर बढ़ी है, जहां पहले शावकों की मृत्यु दर चिंता का विषय थी लेकिन अब बेहतर देखभाल और प्राकृतिक अनुकूलन से सफलता मिल रही है.
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत और इतिहास
चीता भारत में 1952 में विलुप्त घोषित हुआ था. 2009-2010 में सर्वोच्च न्यायालय और NTCA ने पुनर्स्थापन की योजना बनाई. 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने अफ्रीकी चीतों (साउथईस्ट अफ्रीकन सब-स्पीशीज) को ट्रायल बेसिस पर लाने की अनुमति दी. 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से 8 चीतों (5 मादा, 3 नर) को कूनो में रिलीज किया, जिससे प्रोजेक्ट औपचारिक रूप से शुरू हुआ.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें