जंग का साइड इफेक्ट, किचन से गायब होने लगी कुछ खास डिश, रेस्टोरेंट बदल रहे मेन्यू

जंग का साइड इफेक्ट, किचन से गायब होने लगी कुछ खास डिश, रेस्टोरेंट बदल रहे मेन्यू


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LPG Shortage Impact: सागर में अब होटल रेस्टोरेंटों से थाली से व्यंजन बदलता जा रहा है और मेन्यू से चीजे गायब होती जा रही हैं. सागर के अलग-अलग रेस्टोरेंट में कड़ी और पनीर जैसी डिश गायब हो गई है और कई जगहों पर रोटी के स्थान पूड़ी ने ले ली है. 

LPG Shortage Impact: ईरान इजरायल युद्ध का असर भारत में एलपीजी और कमर्शियल गैस संकट के रूप में देखा जा रहा है और सागर में अब होटल रेस्टोरेंटों से थाली से व्यंजन बदलते जा रहा है मेन्यू से चीजें गायब होती जा रही हैं. सागर के अलग-अलग रेस्टोरेंट में कड़ी और पनीर जैसी डिश गायब हो गई है और कई जगहों पर रोटी का स्थान पूड़ी ने ले लिया है. इन होटल रेस्टोरेंट में आने वाले ज्यादातर स्टूडेंट और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग होते हैं और ऐसे में उन्हें जो मिलता है वह खाना पड़ रहा नहीं तो पैसे ज्यादा लगेंगे तो बजट भी बिगड़ जाएगा. दूसरी तरफ शहर में चाय की दुकान से लेकर होटल और रेस्टोरेंट गैस नहीं होने की वजह से बंद होते जा रहे हैं.

गैस नहीं होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी हॉस्टल में रहने वाले और रूम लेकर रहने वाले स्टूडेंटों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सुबह से उन्हें नाश्ता नहीं मिल पा रहा और जिन रेस्टोरेंट में पहुंच रहे हैं वहां पर समय से खाना नहीं मिल पा रहा है रेस्टोरेंट संचालकों ने भी यह माना है कि कमर्शियल गैस जिसके पास जितनी थी उसका उपयोग बड़ी सावधानी के साथ कर रहे हैं तब जाकर इनका संचालन हो पा रहा है,

सागर सिविल लाइन में राधे रेस्टोरेंट चलाने वाले अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि खाने की सामग्री में जो भी इस तरह की रेसिपी है जिसमें ज्यादा गैस लगती है उनको पिछले एक हफ्ते से बनाना बंद कर दिया है गर्मी के समय में लोगों को कड़ी अच्छी लगती है लेकिन उस बनाने में गैस बहुत अधिक लगती है इसलिए वह बंद है, पहले ज्यादा आइटम बनते थे और लोगों की पसंद के अनुसार उनको देते थे लेकिन अब चुनिंदा चीज ही तैयार कर रहे हैं और सभी को एक जैसी थाली ही परोस रहे. उनका यह भी कहना है कि बाजार से जो भी चीज ला रहे हैं पैसे भी महंगे हो गए हैं हम लोग रेट इसलिए नहीं बढ़ा रहे क्योंकि स्टूडेंट अधिकतर आते हैं उन पर बोझ बढ़ जाएगा. हम लोगों का प्रॉफिट आधा हो गया है अब भट्टी की व्यवस्था कर रहे हैं.

इंडक्शन से हो रहा काम
गोपालगंज में मां की रसोई चलने वाली अंकित असाटी बताते हैं कि उनके यहां स्टूडेंट और मजदूर वर्ग के लोग बहुत ज्यादा आते हैं और टिफिन भी चलाते हैं तो सबसे बड़ी दिक्कत तो समय की हो रही है जिसको 12:00 बजे टिफिन देने जाना होता है उसका 3:00 बजे तक पहुंच रहा है क्योंकि गैस खत्म हो गई है और इंडक्शन से कुछ-कुछ काम हो रहा है रोटी बनाना भी बंद हो गया पूरी जल्दी बन जाती है. इसलिए वही चला रहे हैं कड़ी पनीर की सब्जी भी नहीं बन पा रहे. बिहार के सर्वजीत कुमार सागर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं और रूम लेकर रहते हैं जहां पर वह छोटा गैस रखकर खाना बनाते थे लेकिन गैस खत्म हो जाने की वजह से अभी जो 120 रुपया लीटर मिलती थी अब बाय 300 में मिल रही है इसलिए लेना बंद कर दिया खाना खाने रेस्टोरेंट पर आ रहे लेकिन खाना तो मिल रहा है कुछ चीज काम हो गई है तो इसको हम लोग भी समझ रहे हैं की गैस की वजह से दिक्कत है कम से कम मिल रहा है यह ही बहुत है.
एक और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट सौरव पांडे ने बताया कि वह रोज दोपहर का लंच रेस्टोरेंट पर ही करते हैं लेकिन अब धीरे-धीरे रेस्टोरेंट में मेन्यू बदलता जा रहा है हम लोगों को तो डर लग रहा है कि अब यह खाना महंगा ना हो जाए.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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