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भोपाल में इकबाल मैदान का नाम बदलने की मांग पर सियासी विवाद तेज हो गया है. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के बयान के बाद कांग्रेस ने तीखा विरोध दर्ज कराया है. यह मुद्दा अब इतिहास, पहचान और राजनीति के टकराव में बदल गया है. आने वाले समय में इस पर सियासत और तेज होने के संकेत हैं.
भोपाल के इकबाल मैदान पर सियासी तेज हो गई है.
शिवकांत आचार्य
भोपाल. राजधानी में एक बार फिर नाम बदलने की राजनीति ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो द्वारा इकबाल मैदान के नाम बदलने की मांग सामने आते ही राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. यह मामला अब सिर्फ एक मैदान के नाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इतिहास, पहचान और विचारधारा के टकराव में बदलता नजर आ रहा है. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश की राजनीति में प्रतीकात्मक मुद्दे आज भी बने हुए हैं. कांग्रेस नेताओं ने बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा है कि अल्लामा इकबाल ने ही सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा जैसे तराने लिखे हैं. अब उनके नाम पर अपनी सियासत चमकाने वाले घटिया राजनीति कर रहे हैं.
प्रियंक कानूनगो द्वारा इकबाल मैदान के नाम बदलने वाले बयान के बाद कांग्रेस ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे समाज को बांटने वाली राजनीति बताया है. विपक्ष का कहना है कि ऐसे मुद्दों को उठाकर असली समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है. वहीं सत्तापक्ष से जुड़े लोग इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं. इस पूरे विवाद ने भोपाल को एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में ला दिया है. आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा गरमाने के संकेत दे रहा है. भोपाल में सदर मंजिल के ठीक सामने ऐतिहासिक इकबाल मैदान है. यह मैदान कई घटनाओं का गवाह रहा है.
क्या है पूरा विवाद
प्रियंक कानूनगो ने इकबाल मैदान का नाम बदलने की बात कही. इसके बाद यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया. राजनीतिक दलों ने अपने-अपने तरीके से इसे मुद्दा बना लिया. कांग्रेस नेताओं ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि इतिहास और साहित्य से जुड़े नामों के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. उन्होंने इसे नफरत की राजनीति करार दिया और कहा कि समाज में सौहार्द बनाए रखना ज्यादा जरूरी है.
कांग्रेस का तीखा पलटवार, पीसी शर्मा ने उठाए सवाल
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कब तक नाम बदलने की राजनीति चलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि जनता महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद खड़े किए जा रहे हैं. सरकार और सरकार के लोगों ने राहत दिलाने के लिए काम करना चाहिए. पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ा दिए हैं. इनकी कालाबाजारी पर रोक नहीं है. आम आदमी परेशान हो रहा है.
अल्लामा इकबाल कौन थे ?
अल्लामा मुहम्मद इक़बाल का जन्म 9 नवंबर 1877 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के सियालकोट में एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार में हुआ था. उन्होंने लाहौर से प्रारंभिक और उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा यूरोप जाकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में डिग्री और म्यूनिख विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की. साथ ही उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी कर बैरिस्टर भी बन गए. इक़बाल उर्दू और फारसी के महान शायर तथा दार्शनिक थे. उनकी शायरी में ‘खुदी’ (आत्म-सम्मान), इस्लामी पुनर्जागरण और मुस्लिम एकता का गहन संदेश था. उनकी प्रमुख कृतियाँ ‘बांग-ए-दरा’, ‘इसरार-ए-खुदी’, ‘शिकवा’ और ‘जवाब-ए-शिकवा’ आज भी प्रेरणादायक हैं. शुरू में वे भारतीय राष्ट्रवाद के समर्थक थे, लेकिन बाद में भारतीय मुसलमानों के लिए अलग मातृभूमि की कल्पना रखी, जो पाकिस्तान आंदोलन का आधार बनी. लंबी बीमारी के बाद 21 अप्रैल 1938 को लाहौर में उनका निधन हो गया और उन्हें वहीं दफनाया गया. उन्हें ‘शायर-ए-मशरिक’ और पाकिस्तान का आध्यात्मिक पिता कहा जाता है.
खिरनी वाले मैदान को क्यों मिला इकबाल का नाम?
इकबाल मैदान के आसपास शौकत महल, सदर मंजिल, शीशमहल और रियाज मंजिल जैसी कई ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं, जो इस इलाके की विरासत को दर्शाती हैं. पुराने समय में यहां खिरनी के पेड़ बड़ी संख्या में होते थे, इसलिए इसे खिरनी वाला मैदान कहा जाता था. बाद में मशहूर शायर अल्लामा इकबाल के यहां ठहरने के बाद प्रशासन ने इसका नाम बदलकर इकबाल मैदान कर दिया. जानकारों के मुताबिक, अल्लामा इकबाल 1931 से 1936 के बीच चार बार भोपाल आए थे. उन्होंने यहां करीब छह महीने बिताए और इसी दौरान कई अहम रचनाएं कीं. बताया जाता है कि उनकी 14 प्रसिद्ध नज़्में भोपाल में ही लिखी गईं, जिन्हें बाद में ‘ज़र्ब-ए-कलीम’ में शामिल किया गया.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें