सहवाग से पाकिस्तानी अंपायर ने मांगा था ‘घूस’, विकेट बचाने के लिए दिया गिफ्ट

सहवाग से पाकिस्तानी अंपायर ने मांगा था ‘घूस’, विकेट बचाने के लिए दिया गिफ्ट


नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग को खुलकर अपनी बात रखने के लिए जाना जाता है. उनको दुनिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में से गिना जाता है. वह ऐसे खिलाड़ी थे जिन्हें गेंदबाज की प्रतिष्ठा की कोई परवाह नहीं थी और वे हर फॉर्मेट में अपने शॉट्स खेलने से कभी नहीं डरते थे. सहवाग ने अंपायर से जुड़ा खास किस्सा सुनाया था जिसमें उनको पाकिस्तान के असद राऊफ को गिफ्ट देना पड़ा था.

सहवाग टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने और अब तक वे इकलौते भारतीय हैं जिन्होंने रेड बॉल क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाए हैं. इससे साफ है कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट के सबसे चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में गेंदबाजों की जमकर धुनाई की. शानदार बल्लेबाजी के अलावा सहवाग में मैच अधिकारियों को प्रभावित करने की भी कला थी, चाहे वह मीठी बातों से हो या किसी और तरीके से.

एक बार उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व अंपायर असद रऊफ को युवराज सिंह को LBW ना देने पर सवाल किया था, जवाब में उन्होंने कहा, अपना लड़का है, कैसे आउट दे दें. इस पर सहवाग बोले, मैं भी तो आपका ही लड़का हूं. असद ने इस पर कहा, हो लेकिन मुझे कुछ देते नहीं हो….इसके बाद उन्होंने कुछ ब्रांडेड गिफ्ट्स दिए.

सहवाग ने इंटरव्यू में कहा, “असद रऊफ को चीजें इकट्ठा करने का बहुत शौक था. उन्हें ब्रांडेड चश्मे, टी-शर्ट्स, जूते पहनना पसंद था. मैं उस समय एडिडास का ब्रांड एंबेसडर था, तो मैंने उन्हें जूते, टी-शर्ट्स और चश्मे गिफ्ट किए और मजाक में कहा कि जब तक मैं बल्लेबाजी कर रहा हूं, उंगली मत उठाना.”

“और उन्होंने वैसा ही किया. हम 2008 में मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल रहे थे. वही मैच जिसमें वीवीएस लक्ष्मण ने हमें जीत दिलाई थी. मिशेल जॉनसन ने शॉर्ट पिच गेंद डाली, मैंने कट शॉट खेला लेकिन गेंद बल्ले का इतना मोटा किनारा लेकर गई कि ड्रेसिंग रूम में बैठे खिलाड़ियों तक को आवाज सुनाई दी, लेकिन रऊफ ने मुझे नॉट आउट दे दिया.”

सहवाग ने कहा कि किनारा इतना मोटा था कि ड्रेसिंग रूम में बैठे खिलाड़ी भी साफ सुन सकते थे. रऊफ ने ऑस्ट्रेलिया की जोरदार अपील को नजरअंदाज कर दिया. “रिकी पोंटिंग इतने गुस्से में थे कि वे अंपायर के पास जाकर बहस करने लगे कि उन्होंने नॉट आउट कैसे दे दिया. अंपायर ने कहा कि कोई किनारा नहीं था. पोंटिंग मेरे पास आए और पूछा ‘क्या तुमने बल्ले से लगाया?’ मैंने कहा ‘हां’. फिर वे असद रऊफ के पास गए और कहा ‘वीरू खुद कह रहा है कि उसने बल्ले से लगाया’. फिर दोनों मेरे पास आए और रऊफ ने मुझसे पूछा ‘क्या तुमने बल्ले से लगाया?’ तो मैंने कहा ‘नहीं’.”

“पोंटिंग मुझसे बहस करने लगे कि ‘अभी तो तुमने कहा था कि बल्ले से लगाया’. तब मैंने उनसे कहा, ‘मिस्टर पोंटिंग, आप कभी खुद आउट होकर नहीं चलते और दूसरों से उम्मीद करते हैं कि वे चलें. मैंने कहा कि अंपायर का काम है फैसला देना, उसे करने दो, आप अपना काम करो और मैं अपना करूंगा.’”



Source link