सीधी की जिस नदी के पानी से मिटता था सूखा रोग! अब नहाए तो बीमार हो जाएंगे, जानें हालात

सीधी की जिस नदी के पानी से मिटता था सूखा रोग! अब नहाए तो बीमार हो जाएंगे, जानें हालात


Last Updated:

Ground Report: सीधी के चुन्हा गांव से निकलने वाली सूखा नदी करीब 25 किलोमीटर बहकर सोन नदी में मिलती है. रीवा रियासत काल की रीवा राज दर्पण पुस्तक में भी इसका उल्लेख जीवनदायिनी नदी के रूप में मिलता है. वर्षों से यह नदी लोगों की आस्था और जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, लेकिन अब इसका अस्तित्व संकट में है.

Sidhi News: मध्य प्रदेश के सीधी की जीवनदायनी सूखा नदी वर्तमान में सरकारी अनदेखी के चलते प्रदूषण का शिकार हो रही है. चुनावी माहौल में नदी संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे तो कई किए गए पर सालों बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं. दावा किया जाता है कि एक समय में सूखा नदी में स्नान करने मात्र से सूखा रोग ठीक हो जाता था, लेकिन आज इसी नदी में स्नान करने वालों को गंभीर रोग होने की आशंका बनी रहती है. चुन्हा गांव से निकलने वाली जीवनदायनी सोन नदी में मिलने वाली सूखा नदी का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है.

सीधी के साहित्यकार नंद कुमार मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि चुन्हा गांव से यह नदी निकलती है, वहां की मिट्टी में चूना पाया जाता है. यही कारण है कि नदी के पानी में कैल्शियम की भरपूर मात्रा रहती थी, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती थी. लेकिन, अवैध कब्जों और लापरवाही के चलते नदी का कैचमेंट एरिया सिमटता जा रहा है और इसका प्राकृतिक स्वरूप खत्म होता दिख रहा है. वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने बताया, सूखा नदी अब नदी नहीं, बल्कि नाले में तब्दील होती जा रही है.

पूर्व क्रिकेटर ने किए थे प्रयास, पर…
विवेक ने बताया, पूर्व कलेक्टर अभिषेक सिंह ने इसके संरक्षण के प्रयास किए थे, लेकिन वे भी राजनीतिक कारणों से अधूरे रह गए. आज स्थिति यह है कि सफाई अभियान सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गया है. सूखा नदी के किनारे कई प्राचीन मंदिर और घाट मौजूद हैं, जिनमें श्री गोपाल दास मंदिर के सामने बना घाट प्रमुख है. पहले यहां लोग स्नान-पूजन के लिए आते थे, लेकिन अब गंदगी और बदबू के कारण लोग यहां रुकना भी पसंद नहीं करते.

नदी में मिल रहे नाले
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार मनोज शुक्ला के अनुसार, शहर के विस्तार के साथ नदी में नालों का गंदा पानी, सीपेज और कचरा लगातार मिल रहा है, जिससे यह कई जगहों पर नाले का रूप ले चुकी है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी साफ पानी स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में इस नदी का जल उपयोग योग्य नहीं रह गया है.

अभी योनजा बन रही है…
नगर पालिका परिषद की सीएमओ प्रिया पाठक ने बताया, स्वच्छता सर्वेक्षण को ध्यान में रखते हुए सफाई अभियान चलाया जा रहा है. गंदे नालों को नदी में मिलने से रोकने के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है और चरणबद्ध तरीके से नदी को साफ करने की योजना पर काम किया जाएगा.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



Source link