पेट्स में किडनी रोग बढ़े, मौत का दूसरा कारण: इंदौर कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, साल में एक बार ब्लड और यूरिन टेस्ट जरूरी – Indore News

पेट्स में किडनी रोग बढ़े, मौत का दूसरा कारण:  इंदौर कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, साल में एक बार ब्लड और यूरिन टेस्ट जरूरी – Indore News




इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 17वीं एफएसएपीएआई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया कि पालतू जानवरों में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और यह उनकी मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी हैं। समय पर पहचान और नियमित जांच से इस स्थिति से बचा जा सकता है। ब्राजील से आए नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मार्सियो बर्नस्टीन ने बताया कि किडनी खराब होने के संकेत शुरुआत में ही दिखने लगते हैं, लेकिन इन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। खाना छोड़ना और वजन घटना प्रमुख संकेत उन्होंने बताया कि बार-बार पेशाब आना, उल्टी होना, भूख कम लगना और तेजी से वजन घटना किडनी रोग के प्रमुख लक्षण हैं। डॉ. बर्नस्टीन ने कहा कि एक साधारण यूरिन टेस्ट से भी बीमारी का पता लगाया जा सकता है। समय पर इलाज शुरू होने पर किडनी फेलियर से बचाव संभव है। डायलिसिस ही बचता अंतिम विकल्प विशेषज्ञों के अनुसार किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस ही प्रमुख विकल्प रहता है। तकनीकी कारणों से पेट्स में किडनी ट्रांसप्लांट संभव नहीं है। साल में एक बार जांच की सलाह डॉक्टरों ने कहा कि पालतू जानवरों का साल में कम से कम एक बार ब्लड और यूरिन टेस्ट कराना जरूरी है, ताकि बीमारी का समय रहते पता चल सके। जयपुर के ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट डॉ. सुरेश कुमार झिरवाल ने बताया कि पेट्स में आंखों की बीमारियां भी बढ़ रही हैं और इनके इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है। मोतियाबिंद के लक्षणों की पहचान जरूरी उन्होंने कहा कि आंखों का रंग बदलना, सफेदी आना और रात में चमक कम होना मोतियाबिंद के संकेत हैं, ऐसे में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।



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