100 साल पहले हर घर में रहता था जादुई बर्तन, पानी रखे बर्फ जैसा ठंडा, जानें खासियत

100 साल पहले हर घर में रहता था जादुई बर्तन, पानी रखे बर्फ जैसा ठंडा, जानें खासियत


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दामोदर अग्निहोत्री बताते हैं कि यह मिट्टी से बना पका हुआ बड़ा घड़ा है. जिसको बुंदेलखंड में कनारी के नाम से जाना जाता है. गर्मी के मौसम में इसमें पानी भरकर रखते थे. जिसमें पानी थोड़ी देर में ठंडा होता था लेकिन मटके से भी अधिक ठंडा पानी हो जाता था. खास करके पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे. जिसमें 20 से 25 लोग का एक साथ रहना बड़ा आसान होता था. छोटे-छोटे बर्तन में पानी कम पड़ जाता था तो इनका इस्तेमाल करते थे या किसी के घर शादी विवाह होता था

आज से 100 साल पहले जब अनाज रखने के लिए कोई केमिकल नहीं आते थे. पानी ठंडा करने के लिए मटका भरने की शिवाय कोई दूसरे उपाय नहीं थे. बुंदेलखंड के हर घर में कनारी के रूप में मिट्टी के बड़े बर्तन कनारी का उपयोग किया जाता था. हर घर में यह आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध हुआ करते थे. छोटे परिवारों में लोग इसे जमीन के अंदर गड्ढा खोदकर गाढ़ देते थे. आज के समय में फ्रिज, वाटर कूलर जैसी चीजों ने इसके महत्व को बेहद कम कर दिया, तो दूसरी तरफ केमिकल के उपयोग से अनाज भंडारण के रूप में भी इसका प्रयोग लगभग बंद हो गया है. जिसकी वजह से यह कनारी घरों से विलुप्त होती चली गई.

सागर के सत्यम कला एवं संस्कृति संग्रहालय अहमदनगर गोपालगंज में बुंदेलखंडी कनारी रखी हुई है जिन्हें 70 वर्षीय दामोदर अग्निहोत्री के ससुर में भेंट की है जो उनके घर में लगभग तीन पीढ़ी से थी अग्निहोत्री के मुताबिक यह सौ साल से भी अधिक पुरानी है. पूरी तरह सुरक्षित है और आज भी इसका उपयोग किया जा सकता है. बुंदेलखंड के लुप्त प्राय इस बर्तन को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संजो कर रखे हुए हैं. आज की पीढ़ी को उससे परिचित करवा रहे.

मिट्टी में छुपाकर रखते थे बर्तन
दामोदर अग्निहोत्री बताते हैं कि यह मिट्टी से बना पका हुआ बड़ा घड़ा है. जिसको बुंदेलखंड में कनारी के नाम से जाना जाता है. यह एक ऐसा बर्तन होता है जो 2 इन 1 है. यानी की पहले के लोग 12 महीने अलग-अलग तरह से इसका उपयोग करते थे. जैसे सर्दी और बरसात के मौसम में कोई भी अनाज भरकर रखते थे ऊपर से जो खुला हुआ भाग था. उसको मिट्टी से छाप कर बंद कर देते थे. जिससे उस अनाज में किसी भी तरह की अन्य चीज मिलाने की आवश्यकता नहीं होती थी. वह कितने समय चाहे उतनी समय तक सुरक्षित रखा रह सकता था.

गर्मी के मौसम में पानी ठंडा रहता
दूसरी तरफ गर्मी के मौसम में इसमें पानी भरकर रखते थे. जिसमें पानी थोड़ी देर में ठंडा होता था लेकिन मटके से भी अधिक ठंडा पानी हो जाता था. खास करके पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे. जिसमें 20 से 25 लोग का एक साथ रहना बड़ा आसान होता था. छोटे-छोटे बर्तन में पानी कम पड़ जाता था तो इनका इस्तेमाल करते थे या किसी के घर शादी विवाह होता था तो उसे दौरान इसी तरह के बर्तन गर्मी के मौसम में भरकर रखते थे. फिर मेहमानों को ठंडा पानी परोसा जाता था.

1 क्विंटल तक गेहूं को एक कनारी में रखा
यह मिट्टी से बना हुआ बर्तन होता है जिसमें 1 क्विंटल तक गेहूं को एक कनारी में रखा जा सकता है. हमारा जो मटका होता है. उसकी परत मुश्किल से आधा इंच की होती है लेकिन जो कनारी होती है. उसकी परत 2 से 3 इंच मोटी होती है. मिट्टी की यह खासियत होती है कि उसकी परत जितनी अधिक मोटी होती है. उसमें उतना अधिक पानी ठंडा होता है. यह बर्तन पक्की मिट्टी यानी की भयंकर आग में तपा हुआ होता है. मोटाई अधिक होने से इसमें अनाज रखना भी सुरक्षित होता है.



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