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Super Seeder Machine Benefits: गेहूं कटाई के बाद खेत खाली नहीं बल्कि कमाई का नया मौका बन सकता है. सुपर सीडर जैसी आधुनिक मशीनें अब किसानों को एक ही बार में जुताई, बुवाई और खाद डालने की सुविधा दे रही हैं. इससे न सिर्फ लागत घट रही है बल्कि मिट्टी की सेहत सुधरकर अगली फसल के लिए बेहतर आधार भी तैयार हो रहा है.
Super Seeder Machine Benefits: रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की कटाई जैसे ही अंतिम दौर में पहुंचती है वैसे ही किसानों के सामने अगली फसल की योजना बनाने की चुनौती खड़ी हो जाती है. अब इस चुनौती का समाधान बनकर सामने आ रही है ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती जो कम समय में बेहतर आय देने का मजबूत विकल्प बनती जा रही है. खास बात यह है कि किसान अब पारंपरिक जुताई के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर सीधे बुवाई की ओर बढ़ रहे हैं. सुपर सीडर मशीन के जरिए बिना जुताई के ही मूंग की बुवाई संभव हो रही है जिससे खेत की नमी बनी रहती है और समय की भी बचत होती है. यही कारण है कि अप्रैल के अंत में समर मूंग की बुवाई को लेकर किसानों में उत्साह बढ़ता नजर आ रहा है.
20 से 30 अप्रैल का समय सबसे उपयुक्त
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की कटाई के तुरंत बाद 20 से 30 अप्रैल के बीच मूंग की बुवाई करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है. इस समय तापमान और मिट्टी की नमी फसल के अंकुरण के लिए अनुकूल रहती है. जल्दी तैयार होने वाली विराट आईपीएम किस्म किसानों के बीच लोकप्रिय है जो लगभग 52-55 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और 12-14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बीज की मात्रा थोड़ी बढ़ाकर बुवाई से पहले थाइरम से बीज उपचार करने और फूल आने के समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है.
सुपर सीडर एक मशीन लेकिन काम कई
सुपर सीडर आधुनिक खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो जीरो टिलेज प्रणाली पर काम करती है. यह मशीन एक साथ कई कार्य करने में सक्षम है. इसमें लगा रोटावेटर मिट्टी को हल्का भुरभुरा करता है जबकि सीड ड्रिल बीज और खाद को निश्चित दूरी और गहराई पर डालती है. इसके पीछे लगा लेवलर खेत को समतल कर देता है. सबसे खास बात यह है कि यह गेहूं या धान की कटाई के बाद बची नरवाई को काटकर मिट्टी में मिला देता है जिससे वह सड़कर जैविक खाद में बदल जाती है. इससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और मिट्टी की संरचना में सुधार होता है.
कम लागत, ज्यादा लाभ और पर्यावरण को फायदा
पारंपरिक खेती में जहां 3-4 बार जुताई की आवश्यकता होती है वहीं सुपर सीडर के माध्यम से एक घंटे में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में बुवाई की जा सकती है. इससे समय, ईंधन और मजदूरी की लागत में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आती है. इसके अलावा प्रति एकड़ ₹1000 से ₹1600 की लागत में मूंग की बुवाई संभव हो जाती है जिस पर सरकार द्वारा 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जा रही है. यह तकनीक पराली जलाने की समस्या को भी खत्म करती है जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है और मिट्टी के उपयोगी जीव सुरक्षित रहते हैं. साथ ही नरवाई के मिट्टी में मिलने से जल धारण क्षमता और वायु संचार में सुधार होता है जिससे सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत पड़ती है.
अन्य फसलों में भी कारगर तकनीक
सुपर सीडर सिर्फ मूंग ही नहीं बल्कि उड़द और लोबिया जैसी फसलों की बुवाई के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है. यह मशीन बीज को सही गहराई पर डालने में मदद करती है जिससे अंकुरण बेहतर होता है और फसल की वृद्धि संतुलित रहती है. समर मूंग की खेती जहां किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है वहीं यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर अगली फसलों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें