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पशु चिकित्सक के अनुसार, गर्मी में पशुओं को पानी के साथ थोड़ा नमक देने से बड़ा फायदा मिलता है. इससे शरीर में लवण संतुलन बना रहता है, पाचन तंत्र मजबूत होता है और दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है. खास बात यह है कि यह आसान और सस्ता उपाय है, जिसकी लागत 16 रुपए से भी कम आती है.
मध्य प्रदेश में अप्रैल की गर्मी अब धीरे-धीरे तेज होती जा रही है और इसका असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, पशुओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. बढ़ते तापमान के चलते पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सीधी जिले के पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह जारी की है.
सीधी वेटरनरी अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि अप्रैल महीने में तापमान बढ़ने के कारण पशुओं के शरीर में पानी और जरूरी लवण (नमक) की कमी होने लगती है. इसके चलते पशु सुस्त हो जाते हैं, उनकी भूख कम हो जाती है और दूध देने की क्षमता पर भी सीधा असर पड़ता है. खासकर दुधारू गाय और भैंसों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो पशु बीमार भी पड़ सकते हैं और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
गर्मी में पशुओं को सेहतमंद रखने के उपाए
डॉक्टर के मुताबिक, गर्मी के मौसम में पशु सामान्य से ज्यादा पानी पीते हैं, लेकिन यदि उन्हें पर्याप्त और साफ पानी नहीं मिल पाता तो उनके शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे दिन में कई बार पशुओं को ठंडा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं. पानी के बर्तन हमेशा भरे रहने चाहिए, ताकि पशु जरूरत के अनुसार पानी पी सकें. इसके साथ ही चारे में मिनरल मिक्सचर और नमक की उचित मात्रा देना भी बेहद जरूरी है, जिससे शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हो सके.
डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि दोपहर के समय पशुओं को तेज धूप में बिल्कुल न रखें. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तापमान सबसे ज्यादा होता है, जिससे पशु जल्दी थक जाते हैं और उनका शरीर गर्म हो जाता है. इसलिए इस समय उन्हें छायादार और हवादार स्थान पर रखना जरूरी है. अगर पशुओं के लिए शेड बनाया गया है तो उसमें हवा के आने-जाने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. गांवों में पेड़ों की छांव या टिन शेड के नीचे भी पशुओं को रखा जा सकता है, लेकिन वहां वेंटिलेशन का ध्यान रखना आवश्यक है.
दूध उत्पादन भी रहेगा सही
उन्होंने कहा कि अगर पशुओं को गर्मी से बचाकर रखा जाए, तो उनकी भूख सामान्य बनी रहती है, शरीर में पानी की कमी नहीं होती और दूध उत्पादन भी प्रभावित नहीं होता. इससे पशुपालकों की आमदनी भी स्थिर बनी रहती है. वहीं, यदि पशु बीमार पड़ते हैं तो इलाज का खर्च बढ़ जाता है और नुकसान ज्यादा होता है.
पशु चिकित्सकों का मानना है कि अप्रैल का महीना पशुओं की विशेष देखभाल का समय है. इस दौरान यदि पशुपालक पानी, छाया, नमक और हवादार वातावरण का सही प्रबंधन कर लें, तो वे अपने पशुओं को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं और उत्पादन को बेहतर बनाए रख सकते हैं.
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